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एंड्रॉयड की दुनिया में धूम मचा रहे जम्मू के 'कंचे'

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आधुनिक युग के बचपन की दुनिया से भले ही कंचे गायब हो गए हों, लेकिन एड्रॉयड की दुनिया में यही कंचे धूम मचा रहे हैं। मोबाइल के एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम में कंचे नामक स्पोर्ट्स ऐप इस कैटगरी के गेम्स में गूगल प्ले स्टोर पर अपलोड होने के दस दिन के भीतर ही जमकर डाउनलोड किया जा रहा है।
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अब तक इसे 60 हजार से ज्यादा यूजर्स डाउनलोड कर चुके हैं। दस दिनों में यह ऐप स्पोर्ट्स सेक्शन में पहले पायदान पर पहुंच गया है। खास बात है कि एंड्रॉयड गेम को जम्मू के कठुआ निवासी युवक ने तैयार किया है।

पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर 29 वर्षीय विशाल गुप्ता ने भारतीय संस्कृति के बचपन की परंपरा से जुड़े लोकप्रिय बच्चों के इस खेल को एंड्रॉयड पर पुनर्जीवित कर दिया।
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विशाल का कहना है कि गूगल ने तीस दिन की टॉप गेम्स रैंकिंग में कंचे को पहला स्थान दिया है। यानी गूगल प्ले स्टोर में यदि गेम डाउलोड करना हो तो टॉप न्यू फ्री कैटगरी में सबसे पहले अब कंचे (पूरण सॉफ्टवेयर) नजर आएंगे।

पिता के नाम पर बनाए कई सॉफ्टवेयर

यही नहीं स्पोर्ट्स सेक्‍शन की ऑल टाइम रैंकिंग में कंचे दूसरे स्थान पर हैं। हैरत की बात है कि एंड्रॉयड की दुनिया में कंचे गेम को 31 जनवरी 2015 को रजिस्टर किया गया था। एंड्रॉयड की दुनिया में इस उपलब्धि से उत्साहित विशाल एंड्रॉयड यूजर्स को रिझाने पर अपना फोकस बढ़ाना चाहते हैं।

अमर उजाला के साथ बातचीत में विशाल ने बताया कि वह अपनी पढ़ाई के दौरान और उसके बाद से अपने पिता पूरण चंद गुप्ता के नाम से विंडो ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए पूरण सॉफ्टवेयर टाइटल से काम करते रहे। पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2007 में पूरण डी फ्रैग सॉफ्टवेयर तैयार किया।

इसके बाद पूरण युटिलिटीज और पूरण फाइल रिकवरी सॉफ्टवेयर तैयार किए। इन सॉफ्टवेयर का रोजाना डाउनलोड औसत दस हजार से अधिक है। पिछले एक वर्ष से होम यूजर्स के बाजार की नब्ज टटोलने के बाद आखिरकार उसे भारत के पारंपरिक खेल कंचे पर गेम तैयार करने की सूझी।
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सबसे ज्यादा आयकर देने वाला सिंगल असैसी

बेहद सादगी में रहने वाला यह सॉफ्टवेयर इंजीनियर हर साल भारी भरकम राशि आयकर के तौर पर जमा करवाता है। कठुआ जिले में सिंगल असैसी की श्रेणी में यह राशि सबसे अधिक कही जा सकती है।

देश और दुनिया के बाकी हिस्सों में पूरण सॉफ्टवेयर की पहुंच बनाने में सफल रहे विशाल गुप्ता ने आर्मी स्कूल जंगलोट से शिक्षा हासिल की।

पुणे से बीई कंप्यूटर साइंस की डिग्री हासिल की। इसके बाद से सॉफ्टवेयर निर्माण को ही समय दे रहे विशाल ने बताया कि वर्ष 2007 से वह कठुआ में रहकर ही पेशेवर कामकाज को संचालित कर रहा है।
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