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सरकार बनाने को पीडीपी ने भाजपा के सामने रखी एक शर्त

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जम्मू कश्मीर ने नई सरकार के गठन की राह में अब भी कई पेंच फंसे हुए हैं। भाजपा और पीडीपी में साथ मिलकर स्थिर सरकार बनाने पर सहमति है, लेकिन, पीडीपी औपचारिक वार्ता से पहले तमाम कोर इश्यूज पर लिखित समझौते पर अड़ी हुई है। भाजपा की ओर से सरकार के गठन के बाद विवादास्पद मुद्दे सुलझाने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन, पीडीपी इस पर सहमत नहीं है।
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पीडीपी चाहती है कि अनौपचारिक बातचीत में ही लिखित दस्तावेज के रूप में न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) को अंतिम रूप दिया जाए। फिर औपचारिक वार्ता में विकास एवं अन्य मसले पर विस्तार से चर्चा को उसे सीएमपी में शुमार किया जाए।

इस दो स्तर की बातचीत के बाद अगर कोई मसला अनसुलझा रहता है तो उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद की बातचीत में सुलझाया जा सकता है। पीडीपी ने हुर्रियत से वार्ता शुरू करने की भी शर्त रखी है। पीडीपी के मुख्य प्रवक्ता नईम अख्तर का कहना है कि नई सरकार के गठन की जल्दबाजी नहीं है।
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कोर इश्यूज को सहमति से सीएमपी में स्थान देना जरूरी है। इसके लिए भाजपा की ओर से महासचिव राम माधव और पीडीपी के डॉ. हसीब द्राबू बातचीत कर रहे हैं।

मोदी-मुफ्ती में दो बार हुई बात

दोनों वार्ताकार अपने आलाकमान की सलाह से बातचीत को आगे बढ़ा रहे हैं। पीडीपी ने पाकिस्तान से बातचीत कर शांति बहाल करने के प्रयासों को सीएमपी में शामिल करने की बात कही थी। इस दिशा में प्रधानमंत्री मोदी ने सकारात्मक कदम उठाया है और भारतीय विदेश सचिव सार्क देशों के दौरे के क्रम में पाकिस्तान का दौरा कर सकते हैं।

यह नई सरकार के सीएमपी फाइनल होने की दिशा में सकारात्मक कदम है। इसके अलावा हुर्रियत से बातचीत कर कश्मीर में अमन के प्रयासों को आगे बढ़ाने की बात है। भाजपा को इस पर एतराज नहीं होना चाहिए चूंकि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में केंद्र की हुर्रियत नेताओं से बातचीत हो चुकी है।

पीडीपी सूत्रों के मुताबिक अब तक वार्ता में दोनों दलों के उच्चस्तरीय नेता शामिल नहीं हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पीडीपी संरक्षक मुफ्ती की दो बार फोन पर बातचीत हुई है। सीएमपी में एक साल के अंदर अफस्पा की वापसी को भी शामिल करने पर पीडीपी का जोर है। अनुच्छेद 370 को अलग रखने की भी शर्त रखी गई है।
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रोटेशनल सीएम पर कोई बातचीत नहीं

केंद्र के सार्वजनिक प्रतिष्ठान एनएचपीसी के रियासत के पावर प्रोजेक्टों की वापसी भी इसमें शुमार है। जम्मू को कश्मीर से भावनात्मक रूप से जोड़ने के प्रयास को भी सीएमपी में शामिल किए जाने पर जोर दिया गया है। पीडीपी चाहती है इन मुद्दों समेत विकास और क्षेत्रीय संतुलन को सीएमपी में शामिल किया जाए।

इस होम वर्क के बाद दोनों दलों के सांसदों और प्रमुख नेताओं में टेबल पर वार्ता होगी। इस वार्ता में पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती शामिल नहीं होंगी। छह सदस्यीय पीडीपी टीम का नेतृत्व पूर्व डिप्टी सीएम मुजफ्फर हुसैन बेग करेंगे। रोटेशनल सीएम पर कोई बातचीत नहीं होगी।

मुफ्ती छह साल के लिए मुख्यमंत्री होंगे जबकि डिप्टी सीएम भाजपा को होगा। सीएमपी फाइनल होने पर दो दिन में सरकार गठन हो सकता है, लेकिन, अभी तक इसके लिए कोई तिथि तय नहीं है।
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