जम्मू रेलवे स्टेशन पर दिन-ब-दिन ट्रेनों और यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन अभी तक रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म की संख्या को बढ़ाया नहीं जा सका है। आज भी जम्मू का मॉडल रेलवे स्टेशन तीन प्लेटफार्म पर निर्भर है, जिसके कारण आए दिन यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ट्रेनों को प्लेटफार्म पर स्थान मिलने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। इसी कारण कई ट्रेनें देरी से प्लेटफार्म पर पहुंचने के अलावा रवाना हो रही हैं।
रेलवे स्टेशन जम्मू को मॉडल रेलवे स्टेशन की सूची में रखा गया है, लेकिन इस स्टेशन पर जरूरत के अनुसार प्लेटफार्म नहीं है। 1972 में जम्मू रेलवे स्टेशन तीन प्लेटफार्म के साथ शुरू हुआ था।
उस समय स्टेशन पर दो ट्रेनें पहुंचती थीं। ट्रेनों की संख्या बढ़ती गई और 2003 तक ट्रेनों की संख्या दस पहुंच गई। ट्रेनों और यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ ही प्लेटफार्म कम पड़ने लगा। मौजूदा समय में जम्मू पहुंचने वाली ट्रेनों की संख्या 36 है, लेकिन प्लेटफार्म आज भी 1972 की तरह तीन हैं।
आंकड़ों से अंदाजा लग जाता है कि स्टेशन पर प्लेटफार्म की कमी के कारण किस तरह से यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 2012 में रेलवे ने अतिरिक्त प्लेटफार्म बनाने को मंजूरी दी, लेकिन जब इसके निर्माण कार्य को लेकर प्रयास शुरू हुए तो प्लेटफार्म से कुछ दूरी पर मौजूद ऑयल डिपो अड़चन बन गए।
सर्वे से पता चला कि जब तक ऑयल डिपो नहीं हटेंगे तब तक नए प्लेटफार्म का निर्माण संभव नहीं है। रेलवे ने ऑयल डिपो को स्थानांतरित करवाने को लेकर कई प्रयास किए हैं, लेकिन अभी तक न तो ऑयल डिपो स्थानांतरित हो पाए हैं और न ही नया प्लेटफार्म बन पाया है।