कहा-सरकार के पांच माह के कार्यकाल के बाद भी नहीं हो पाया प्रावधान
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर सरकार के सत्ता में आने के पांच माह बाद भी जनप्रतिनिधि विधायकों के लिए निर्वाचन क्षेत्र विकास निधि (सीडीएफ) राशि का प्रावधान नहीं हो पाया है। अब नए वित्त वर्ष से ही सीडीएफ राशि मिलने की उम्मीद है। इसे आगामी बजट सत्र में सरकार की ओर से लाया जा सकता है।
वहीं, सत्तापक्ष और विपक्ष से विधायकों ने सीडीएफ को तीन करोड़ से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने की मांग की है। इसमें जरूरी छोटे कार्यों को बिना निविदा के करवाने पर भी जोर दिया जा रहा है। जम्मू कश्मीर में पांच साल बाद सरकार बनने के बाद संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में सीडीएफ राशि के माध्यम से विकास को गति मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
विधायकों के कार्यकाल के लगभग पांच माह बीत चुके हैं। प्रदेश में 90 विधानसभा क्षेत्रों में वर्तमान में 88 विधायक हैं। इनमें जम्मू की नगरोटा और एक उमर अब्दुल्ला द्वारा कश्मीर में लड़ी गई एक सीट खाली है। हालांकि, पांच अन्य नामित विधायक भी हैं, लेकिन इन पर अभी कोई फैसला नहीं हो पाया है।
पिछली सरकार में विधायकों को तीन करोड़ रुपये का सीडीएफ देने का प्रावधान था, यानी उस समय छह साल की सरकार में प्रत्येक विधायक को विकास कार्यों के लिए 18 करोड़ रुपये मिलते थे। वर्तमान में सरकार का कार्यालय पांच साल को हो गया है। बताया जा रहा है कि अप्रैल से नए वित्त वर्ष में विधायकों को सीडीएफ जारी हो सकता है।
जनता की अपेक्षाएं पूरी करना जरूरी
भाजपा के वरिष्ठ नेता शाम लाल शर्मा का कहना है कि लंबे समय बाद सत्ता में सरकार आई है। ऐसे में लोगों की अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं। इसके लिए पर्याप्त सीडीएफ उपलब्ध करवाया जाना चाहिए, ताकि सभी विधानसभा क्षेत्रों में समान विकास हो सके। विधानसभा क्षेत्रों में समय के साथ जरूरतें भी बढ़ी हैं, जिन्हें पूरा किया जाना चाहिए।
10 लाख के कार्य बिना निविदा से करवाएं
बिश्नाह से भाजपा विधायक डा. राजीव भगत का कहना है कि विधायकों के लिए 10 लाख रुपये तक के जरूरी कार्यों के लिए निविदा की प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए। खासतौर पर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों में कई ऐसे जरूरी कार्य होते हैं, जिनके लिए तत्काल राशि की जरूरत होती है। सरकार ऐसे प्रावधान लाए, ताकि जरूरी कार्यों को करवाने में कोई रुकावट न हो।