कश्मीर घाटी से बाहर स्थानांतरित करने और बकाया वेतन जारी किए जाने की मांग को लेकर बुधवार को पीएम पैकेज के तहत कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारी जम्मू प्रेस क्लब के बाहर प्रदर्शन करने के लिए पहुंचे। इस दौरान पुलिस ने उन्हें सड़क से हटकर प्रदर्शन करने के लिए कहा, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करने लगे। इस पर पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
बताया जा रहा है कि उन्हें एक बस में बिठाकर पुलिस लाइन ले जाया गया है। वहीं, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार पुलिस के बल पर उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे।
एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'हमने उन्हें हटने के लिए मनाने की कोशिश की, लेकिन चूंकि वे प्रदर्शन जारी रखने पर अड़े थे, इसलिए हमने उन्हें एहतियातन हिरासत में ले लिया।' अधिकारी ने कहा, 'आधे घंटे या एक घंटे के शांतिपूर्ण विरोध पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन वे आधी रात तक घंटों जगह घेर रहे हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी हो रही है। इसी के चलते यह कदम उठाया गया है।'
पिछले साल मई महीने में एक के बाद एक हुई टारगेट किलिंग के चलते घाटी में कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारी और जम्मू के रहने वाले आरक्षित वर्ग के कर्मचारी जम्मू लौट आए थे। मई 2022 से जम्मू में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि उन्हें कश्मीर घाटी से बाहर तबादला किया जाए।
चार फरवरी को जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि कश्मीर में कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए गए हैं। ज्यादातर कर्मचारियों को शहरी और नगर क्षेत्र में तैनात किया गया है। कई कर्मचारियों ने घाटी में अपनी सेवाएं फिर शुरू कर दी हैं। उनके लंबित वेतन को जारी करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों ने दावा किया है कि केवल कुछ सौ कर्मचारियों ने मजबूरी में ड्यूटी के लिए कश्मीर गए हैं। जबकि कई कर्मचारी असुरक्षा की भावना के कारण घाटी में लौटने को तैयार नहीं हैं।
प्रदर्शन में शामिल योगेश पंडिता ने कहा, "हमने दर्जनों ज्ञापन सौंपे हैं और उपराज्यपाल से भी मिले हैं, लेकिन हमारी सभी दलीलें अनसुनी कर दी गई हैं। पंडित समुदाय का सबसे बड़ा त्योहार महाशिवरात्रि कुछ दिन बाद मनाया जाना है, लेकिन सरकार उन्हें वेतन जारी नहीं कर रही है।”
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सितंबर में सरकार ने कई कर्मचारियों का वेतन रोक लिया था।
इससे उन्हें आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अगर वह कश्मीर लौटते हैं तो उन्हें जान का खतरा है और अगर जम्मू रहते हैं तो आर्थिक तंगी झेलनी पड़ रही है। सरकार से उनकी अपील है कि उनकी मांगों को जल्द पूरा किया जाए।