जम्मू में बुधवार को नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि भाजपा के शासन के दौरान कश्मीर पंडितों की घाटी में वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बजाय पीछे की ओर खिसक गई है। साथ ही उन्होंने कहा कि भाजपा के पास अपने दस साल के शासन में राम मंदिर के सिवा दिखाने को और कुछ भी नहीं है। उन्होंने आम जनता के हित के लिए कुछ भी ऐसा नहीं किया गया है, जिसे वे जनता में जाकर बता सके।
नेकां के उपप्रधान व पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र सरकार एक राष्ट्र एक चुनाव को लेकर गंभीर नहीं है। अगर उसकी ऐसी मंशा है, तो प्रयोग के तौर पर जम्मू-कश्मीर में 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव करवाकर एक माडल पेश करे। उन्होंने एकीकृत चुनाव विचार के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाया।
शेर-ए-कश्मीर भवन जम्मू में बुधवार को गुज्जर बक्करवाल सम्मेलन में पत्रकारों के सवालों पर उमर ने कहा कि यदि आप अब संसद के साथ विधानसभा चुनाव (जम्मू और कश्मीर में) नहीं करा सकते हैं, तो आप कैसे कल्पना करते हैं कि आप कभी संसद चुनावों के साथ (देशव्यापी) विधानसभा चुनाव कराएंगे, जबकि यूपी, बिहार और जैसे राज्य जहां पर्याप्त सुरक्षाबलों की मौजूदगी की जरूरत होती है वहां मतदान हुआ है। उन्होंने दावा किया कि इंडिया गठबंधन को जम्मू-कश्मीर में शानदार जनादेश मिलेगा। जब जनादेश आएगा, तो यह एक-दलीय शासन के लिए एक शानदार जनादेश होगा। इसलिए चुनाव के बाद कोई गठबंधन नहीं होगा। हम चुनाव के बाद गठबंधन में विश्वास नहीं करते हैं।
सीट बंटवारे को लेकर अब्दुल्ला ने गठबंधन के भीतर टकराव की बात को खारिज किया। कहा सीट बंटवारे पर कांग्रेस के साथ अभी कोई बातचीत नहीं हुई है। हमारा प्रयास जम्मू कश्मीर और लद्दाख की सभी सभी छह संसदीय सीटें जीतने का होना चाहिए और उन्हें इंडिया गठबंधन के साथ रहना चाहिए। कई लोग चुनाव लड़ना चाहते हैं। तीन सीटें इंडिया गठबंधन के पास हैं, उन पर चर्चा करने की कोई आवश्यकता नहीं है, लेकिन वर्तमान में मौजूदा भाजपा के पास बाकी तीन सीटों को कैसे जीता जाए, इस पर बातचीत होगी।
इंडिया गठबंधन में प्रधानमंत्री पद के दावेदार पर अभी कोई चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने भाजपा के एक दशक लंबे शासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावी जीत के लिए धार्मिक अपील का सहारा लेना उनके शासन की विफलता को दर्शाता है। भाजपा से इस पर सवाल पूछा जाना चाहिए। कांग्रेस से युवा नेताओं के जाने के बारे में एक सवाल पर उमर ने इसे राजनीति में बार बार होने वाली घटना बताया, कहां यहां आना जाना लगा रहता है। श्री राम मंदिर समारोह में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के शामिल नहीं होने पर उमर ने कहा इसका कांग्रेस बेहतर जवाब दे सकती है। फिलहाल हमें कोई निमंत्रण नहीं मिला है। भाजपा के पास अपने दस साल के शासन में राम मंदिर के सिवा दिखाने को और कुछ भी नहीं है। आम जनता के हित के लिए कुछ भी ऐसा नहीं किया गया है, जिसे वे जनता में जाकर बता सके। हम राम मंदिर में सियासत नहीं करना चाहते है, लेकिन भाजपा ने पूरी कोशिश की है कि इसे एक राजनीतिक मुद्दा बनाया जाए।
भारत जोड़ो न्याय यात्रा में भाग लेने के लिए मुझे और डा. फारूक अब्दुल्ला को राहुल गांधी तथा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से निमंत्रण मिला है और जहां यह संभव होगा हम इसमें शामिल होंगे। केंद्र सरकार के पिछले एक दशक के कार्यकाल के दौरान कश्मीरी पंडितों की कश्मीर वापसी की प्रक्रिया को ठेस पहुंची है। आतंकी गतिविधियां बढ़ी हैं। हमारे कार्यकाल में राजोरी-पुंछ को आतंकवादमुक्त बनाया गया था। लेकिन आज वहां आए दिन आतंकी हमले हो रहे हैं। इससे पूरे सुरक्षा परिदृश्य पर असर पड़ रहा है। पंडितों की वापसी पर भाजपा सरकार ने सियासत के सिवा कुछ नहीं किया है। वर्षगांठ (पलायन दिवस 19 जनवरी) एक काला दिन बनी हुई है। हमारा मानना है कि जिन लोगों को अपने घरों से बेघर होना पड़ा, उनकी सम्मान के साथ वापसी होनी चाहिए। कश्मीरी पंडितों के बिना कश्मीर अधूरा है।