शुरूआत होती है, 1932 में जब कश्मीर में श्रीनगर से सटे सौर गांव में 5 दिसंबर 1905 को जन्मे शेख अब्दुल्ला शिक्षक की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए और राजनीतिक पार्टी ऑल जम्मू एंड कश्मीर मुस्लिम कॉन्फ्रेंस का गठन किया।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में एमएससी करने वाले शेख अब्दुल्ला ने राजनीति की शुरूआत कश्मीरियों की भलाई के मुद्दों के साथ की थी। समय के साथ उनकी राजनीति वंशवाद की ओर चली गई।
5 मार्च 1948 को वह जम्मू कश्मीर के दूसरे प्रधानमंत्री बने। इसके बाद 25 फरवरी 1975 को मुख्यमंत्री बने और फिर दूसरी बार 9 जुलाई 1977 को सीएम बने। शेख अब्दुल्ला के निधन के बाद फारूक अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बने। फारूक 1982, 1986 और 1996 में मुख्यमंत्री रहे।
1999 के लोकसभा चुनाव में महबूबा मुफ्ती को हराकर फिर संसद पहुंचे और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री बने। 2001 में वो देश के सबसे युवा विदेश मंत्री बने। 2002 में फारूक ने उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया। उसी साल हुए विधानसभा चुनाव में उमर गांदरबल सीट से हार गए। 2008 में हुए विधानसभा चुनाव में नेकां सत्ता में आई।
फारूक ने उमर को मुख्यमंत्री पद के लिए आगे किया और जनवरी, 2009 में शेख अब्दुल्ला की तीसरी पीढ़ी उमर अब्दुल्ला पहली बार जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री बने। 2024 विस चुनाव में उमर के बेटे जहीर और जमीर भी प्रचार में उतरे। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगले लोकसभा चुनावों में उमर का कोई एक बेटा मैदान में उतर सकता है।