हवन और कलश विसर्जन के साथ सुई में आयोजित कथा का समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
मिश्रीवाला। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को जीने का मार्ग दिखाती है। कथा के अनुसार मोक्ष की प्राप्ति के लिए आत्मज्ञान और धर्मपरायणता आवश्यक है। यह ज्ञान गिरिधर गोपाल व्यास देव ने बुधवार को सुई में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन संगत को दिया।
कथा का बुधवार को हवन और भंडारे के साथ समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन सुबह 10 बजे हवन किया गया और फिर बाबा जित्तो और बुआ कोड़ी के पवित्र बाबा तालाब सरोवर में कलश विसर्जित किए। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
कथावाचक ने अंतिम दिन भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि कृष्ण और सुदामा की दोस्ती हिंदू पौराणिक कथाओं में एक प्रसिद्ध और पवित्र मित्रता की कहानी है। यह दोनों भगवान कृष्ण के समय के हैं और उनकी मित्रता एक आदर्श मित्रता का उदाहरण हैं।
यह कहानी दिखाती है कि सच्ची मित्रता में कोई भेदभाव नहीं होता है और मित्रता के बंधन को बनाए रखने के लिए हमें एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए। उसके उपरांत राजा परीक्षित की कथा भी सुनाई। अंत में आरती के बाद आयोजक संदीप चिब की ओर से भंडारे का आयोजन किया गया।