गुज्जरनगर में सड़क से मलबा साफ करती जेसीबी।
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गुज्जरनगरइस इलाके में लोगों का जबरदस्त नुकसान हुआ है। चारों तरफ कीचड़ और मलबा भरा है। गलियों में इस कदर फिसलन है कि पैदल गुजरना तक मुश्किल है। जेसीबी मलबा साफ करने में लगी है लेकिन ज्यादातर मकानों के भीतर घुसा पानी और मलबा यहां रहने वाले खुद ही निकाल रहे हैं। स्थानीय निवासी मोहम्मद हनीफ चौधरी कहते हैं कि बाढ़ का नुकसान झेलने के बाद अब मजदूर लगाने के लिए उनके पास पैसे नहीं। उनके अनुसार घर को पूरी तरह साफ करने में हफ्ता-दस दिन लगेगा, लेकिन इसके अलावा काेई चारा नहीं।
महाराजा हरि सिंह पार्क के सामने बारिश से खराब हुए इन्वर्टर को मरम्मत के लिए मलबे
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लोअर गोरखानगर
यहां तबाही का आलम दूर से ही दिख जाता है। सड़क पर मलबे की वजह से चलना मुश्किल है। ट्रांसफार्मर टूटे पड़े हैं। लोगों ने खराब हो चुका सामान घरों के बाहर फेंक दिया है। कमरों में अभी तक मलबा और कीचड़ है। पीने के पानी के लिए उन्हें हैंडपंप का सहारा है। पानी भरने के लिए प्लास्टिक की केन लिए तेजी से जा रहीं निशा बताती हैं कि उन्होंने बाढ़ पहले भी देखी है लेकिन तबाही का ऐसा मंजर पहले नहीं देखा। उनके अनुसार ज्यादातर लोग ऐसे हैं, जिनके घरों में पानी भरा है, लेकिन वे रोज कमाने-खाने वाले लोग हैं। मजदूर लगाने के लिए पैसे कहां से लाएं।
पीरखो स्थित श्री राम मंदिर में भरा पानी और मलबा।
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मलबा निकालने रिश्तेदारों को बुलाया
लोअर गोरखा नगर में रहने वाले नितिन का फर्नीचर, फ्रिज आदि सब कुछ खराब हो गया। घर में चारों तरफ मलबा और पानी भरा था। वे बताते हैं कि उन्होंने अपने एक रिश्तेदार को मलबा निकालने के लिए बुलाया है। दोनों साथ मिलकर दो दिन से घर साफ कर रहे हैं। अभी और भी दिन लगेंगे।
रोजी-रोटी को कीचड़ में घुसेअशोक एक इलेक्ट्रीशियन हैं। वे एक घर में बिजली का सामान ठीक करने गए थे। उनके कपड़े जूते-सब कीचड़ से भरे थे। बतौर अशोक और कोई वक्त होता तो वे कभी इस तरह कीचड़ में न घुसते। लेकिन बारिश की वजह से काम प्रभावित हुआ है। रोजी-रोटी के लिए वे पानी और कीचड़ कुछ नहीं देख रहे।
गुज्जरनगर में अपने घर से मलबा निकालती महिला।
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लाखों का नुकसान, हजारों मजदूरों को दिएमहाराजा हरि सिंह पार्क के सामने स्थित व्यवसायी शहबाज मलिक कहते हैं कि बीते मंगलवार हुई बारिश से उनके होटल के 12 कमरों में पानी और मलबा भर गया। हालात यह थी कि 12 मजदूरों के साथ खुद लगे। लाखों का नुकसान हुआ। वहीं 800 रुपये प्रति मजदूर के हिसाब से 12 मजदूरों की दिहाड़ी करीब दस हजार एक दिन की दे रहे हैं। अभी तक मलबा निकल रहा है। बारिश के बाद ये मार अलग से पड़ी है। शहबाज की तरह शहर में कई व्यवसायी हैं जो सामान के नुकसान के साथ ही अब बाढ़ के बाद मजदूरों का अतिरिक्त खर्च झेल रहे हैं।