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Jammu & Kashmir: शिक्षक पिता को आतंकियों ने गोली मारकर की थी हत्या, आतंक के बीच से निकलकर वाहिदा ने रचा इतिहास

Sun, 06 Oct 2024 04:15 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

जम्मू-कश्मीर की वाहिदा प्रिज्म खान ने आतंकवाद के बावजूद नेवी में लेफ्टिनेंट कमांडर का पद हासिल किया, बनीं नेवी में शामिल होने वाली जम्मू-कश्मीर की पहली महिला।
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लेफ्टिनेंट कमांडर वाहिदा खान प्रिज्म - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजोरी जिले के थन्नामंडी गांव में जन्मीं लेफ्टिनेंट कमांडर वाहिदा खान प्रिज्म नौसेना सर्जन हैं। वह 2006 में पुणे के सशस्त्र बल मेडिकल कॉलेज में वार्षिक परेड की कमान संभालने वाली पहली महिला थीं। उन्हें नौसेना में शामिल होने वाली जम्मू और कश्मीर की पहली महिला का गौरव भी प्राप्त है। वहीं उनकी बड़ी बहन जबीन कौसर डीएसपी हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता शिक्षक थे, जिन्हें आतंकियों ने थन्नामंडी के सरकारी स्कूल में हत्या कर दी थी। वाहिदा के पिता गुलज़ार अहमद उक्त स्कूल में प्रधानाध्यापक थे, जबकि मां हाजरा कौसर एक स्कूल शिक्षिका हैं। ऐसा कॅरियर जम्मू और कश्मीर की महिलाएं, विशेष रूप से मुस्लिम महिलाएं शायद ही चुनती हैं।

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वाहिदा ने थन्नामंडी में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। उन्होंने गवर्नमेंट गर्ल्स स्कूल राजोेरी से इंटरमीडिएट किया। वहीं जम्मू के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की। उन्हें अपने शौक में मोटरसाइकिल चलाना और पहाड़ों पर चढ़ना पसंद था। अपने अन्य भाई-बहनों की तरह एक मजबूत और स्वतंत्र विचारक के रूप में पली-बढ़ीं। उस समय राजोरी खास कर थन्नामंडी जैसे पिछड़े गांवों में महिलाओं की शिक्षा की ओर ख़ास ध्यान नहीं दिया जाता था। उनके जीवन के तरीके की सराहना नहीं की जाती थी, क्योंकि लोग इतने खुले विचारों वाले और प्रगतिशील नहीं थे। इसके चलते उनके परिवार को बहुत कुछ सहना पड़ता था। लेकिन इससे माता-पिता हतोत्साहित नहीं हुए। उन्होंने समर्थन करना जारी रखा।

वाहिदा ने अपने पिता को खुश करने के लिए एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद सशस्त्र बल मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया। 1997 में लखनऊ के ऑफिसर्स ट्रेनिंग स्कूल में ओरिएंटेशन ट्रेनिंग कोर्स किया और 1997 में नौसेना में कमीशन प्राप्त किया। उन्होंने नौसेना में सर्जन कैप्टन के रूप में काम किया। 2016 में उनको मुख्यालय पश्चिमी नौसेना कमान के तहत नौसेना जहाज आंग्रे में अतिरिक्त जहाज सुरक्षा अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने नौसेना के जहाज आईएनएस अंबा पर 19 महीने तक सेवा की। उनका लक्ष्य पनडुब्बियों में काम करने वाली पहली महिला बनना है।

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जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के कारण उनके निजी जीवन को बहुत नुकसान हुआ। 2001 में पिता को स्कूल में आतंकवादियों ने गोली मार दी। इस घटना ने परिवार को स्तब्ध कर दिया। खासकर इसलिए क्योंकि गुलज़ार अहमद मददगार और लोकप्रिय व्यक्ति थे। इनका कोई राजनीतिक जुड़ाव नहीं था। आतंकियों के हाथों पिता की हत्या से वाहिदा टूटी नहीं, बल्कि और मजबूती के साथ आगे बढ़ीं। उन्होंने देश सेवा का कार्य जारी रखा।
वाहिदा की बहन जबीन ने बताया कि हम सभी बहनें अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता को देते हैं, जिन्होंने आत्मनिर्भर बनने और जीवन में अच्छा करने के लिए प्रेरित किया।

वहीदा ने 13 मार्च 2006 को हलचल मचा दी थी, जब उन्हें पुणे के सशस्त्र बल मेडिकल कॉलेज (एएफएमसी) की 22 महिला अधिकारियों सहित 100 से अधिक मेडिकल ग्रेजुएट्स की पासिंग आउट परेड की कमान संभालने वाली पहली महिला के रूप में चुना गया था। उन्होंने यह उपलब्धि योग्यता के बल पर हासिल की। परेड अधिकारी का चयन पिछले वर्षों के प्रदर्शन के आधार पर किया जाता है।

उनकी उपलब्धि, उनकी ईमानदारी, और प्रतिबद्धता के बारे में बहुत कुछ कहती है, जिसका अंदाजा कॉलेज के महानिदेशक वाइस एडमिरल वीके सिंह की टिप्पणियों से भी लगाया जा सकता है, जब उन्होंने उन्हें आमंत्रित लोगों से मिलवाया था। तब उन्होंने कहा था कि इस युवती ने अच्छा काम किया है। डीएसपी जबीन ने बताया कि सशस्त्र बलों की धर्मनिरपेक्ष साख का प्रमाण होने के अलावा ऐसे समय में जब सेना में मुस्लिम अधिकारियों की नियुक्ति के लिए उन्हें कई तरह के प्रश्नों का सामना करना पड़ता था, परेड कमांडिंग अधिकारी के रूप में वाहिदा का चयन आदर्श बदलाव के रूप में देखा गया, जिसने भारत के सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता के युग की शुरुआत को चिह्नित किया।
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एनसीआरटी की चौथी कक्षा की ईवीएस में ज़िक्र
जबीन ने बताया कि वाहिदा का नाम नेशनल काउंसिल आफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग यानी एनसीईआरटी की चौथी कक्षा की एनवायरमेंटल साइंस ईवीएस की पुस्तक में भी जिक्र किया गया है जिसमें उनके बारे में सब कुछ पुस्तक में बताया गया है।

कैसे नाम मे जुड़ा परिज्म
बहन जबीन ने बताया कि शुरू में उनका नाम वाहिदा खान था, उसमें प्रिज्म पिता ने विशेष रूप से जोड़ा था। पिता प्रिज्म के सात रिफ्लेक्टिंग रंगों से रोमांचित थे। प्रिज्म कांच होता है, जो सात रंगों को रिफ्लेक्ट करता है। वो चाहते थे कि वाहिदा भी प्रिज्म जैसे बने और हर ओर अपने रंग बिखेरे। तब से उन्होंने उनका नाम वहीदा प्रिज्म खान रख दिया।
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