जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के कारण उनके निजी जीवन को बहुत नुकसान हुआ। 2001 में पिता को स्कूल में आतंकवादियों ने गोली मार दी। इस घटना ने परिवार को स्तब्ध कर दिया। खासकर इसलिए क्योंकि गुलज़ार अहमद मददगार और लोकप्रिय व्यक्ति थे। इनका कोई राजनीतिक जुड़ाव नहीं था। आतंकियों के हाथों पिता की हत्या से वाहिदा टूटी नहीं, बल्कि और मजबूती के साथ आगे बढ़ीं। उन्होंने देश सेवा का कार्य जारी रखा।
वाहिदा की बहन जबीन ने बताया कि हम सभी बहनें अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता को देते हैं, जिन्होंने आत्मनिर्भर बनने और जीवन में अच्छा करने के लिए प्रेरित किया।
वहीदा ने 13 मार्च 2006 को हलचल मचा दी थी, जब उन्हें पुणे के सशस्त्र बल मेडिकल कॉलेज (एएफएमसी) की 22 महिला अधिकारियों सहित 100 से अधिक मेडिकल ग्रेजुएट्स की पासिंग आउट परेड की कमान संभालने वाली पहली महिला के रूप में चुना गया था। उन्होंने यह उपलब्धि योग्यता के बल पर हासिल की। परेड अधिकारी का चयन पिछले वर्षों के प्रदर्शन के आधार पर किया जाता है।
उनकी उपलब्धि, उनकी ईमानदारी, और प्रतिबद्धता के बारे में बहुत कुछ कहती है, जिसका अंदाजा कॉलेज के महानिदेशक वाइस एडमिरल वीके सिंह की टिप्पणियों से भी लगाया जा सकता है, जब उन्होंने उन्हें आमंत्रित लोगों से मिलवाया था। तब उन्होंने कहा था कि इस युवती ने अच्छा काम किया है। डीएसपी जबीन ने बताया कि सशस्त्र बलों की धर्मनिरपेक्ष साख का प्रमाण होने के अलावा ऐसे समय में जब सेना में मुस्लिम अधिकारियों की नियुक्ति के लिए उन्हें कई तरह के प्रश्नों का सामना करना पड़ता था, परेड कमांडिंग अधिकारी के रूप में वाहिदा का चयन आदर्श बदलाव के रूप में देखा गया, जिसने भारत के सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता के युग की शुरुआत को चिह्नित किया।
एनसीआरटी की चौथी कक्षा की ईवीएस में ज़िक्र
जबीन ने बताया कि वाहिदा का नाम नेशनल काउंसिल आफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग यानी एनसीईआरटी की चौथी कक्षा की एनवायरमेंटल साइंस ईवीएस की पुस्तक में भी जिक्र किया गया है जिसमें उनके बारे में सब कुछ पुस्तक में बताया गया है।
कैसे नाम मे जुड़ा परिज्म
बहन जबीन ने बताया कि शुरू में उनका नाम वाहिदा खान था, उसमें प्रिज्म पिता ने विशेष रूप से जोड़ा था। पिता प्रिज्म के सात रिफ्लेक्टिंग रंगों से रोमांचित थे। प्रिज्म कांच होता है, जो सात रंगों को रिफ्लेक्ट करता है। वो चाहते थे कि वाहिदा भी प्रिज्म जैसे बने और हर ओर अपने रंग बिखेरे। तब से उन्होंने उनका नाम वहीदा प्रिज्म खान रख दिया।