अब तक पर्यटन विभाग पर्यटन स्थलों पर पैसा खर्च करता आया है, लेकिन अब विभाग इन पर्यटन स्थलों से पैसे कमाएगा।
रियासत में विकसित होने वाले पर्यटन स्थलों को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर दिया जाएगा। इससे इन पर्यटन स्थलों को लंबे समय तक मेंटेन करके रखा जा सकता है।
इसका ताजा उदाहरण तवी फ्रंट पार्क है, जिसको शुरू करने के पहले दिन ही निजी कंपनी को दे दिया। इसके अलावा भी कई अन्य पर्यटन स्थलों को निजी हाथों में दिया जा रहा है।
दरअसल, जम्मू के पिछले कुछ साल से विकसित पर्यटन स्थल संबंधित विभागों के पास ही हैं। इसकी वजह से विभाग इनका न सही से रखरखाव कर पाया और न ही इनका दायरा बढ़ा पाया। इनमें बाग-ए-बाहु पार्क और फिश एक्वेरियम मुख्य रूप से शामिल हैं।
इन दोनों को बागवानी और मछली पालन विभाग की ओर से चलाया जा रहा है, लेकिन पर्यटन विभाग अब सभी पर्यटन स्थलों को निजी हाथों में देने की तैयारी में है।
निजी हाथों में पर्यटन स्थल जाएंगे तो इससे राजस्व एकत्र होगा। निजी कंपनियां पैसे खर्च करने के साथ इससे राजस्व कमाएंगी। कुछ हिस्सा पर्यटन विभाग के खाते में जाएगा। इन पर्यटन स्थलों पर फूड कोर्ट शुरू किए जाएंगे।
इससे युवाओं को रोजगार देने का प्रयास किया जा रहा है। विभाग के पास मैन पावर और फंड्स दोनों की कमी है। इसकी वजह से कई पर्यटन स्थल विकसित नहीं हो पाते।
जिन पर विभाग पैसा खर्च कर विकसित करता है, वह मैन पावर और फंड के अभाव में रखरखाव नहीं कर पाते। इसलिए अब विभाग निजी हाथों में इसकी कमान सौंपना चाहता है।
खुद मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने पर्यटन विभाग को निर्देश दिए कि पर्यटन स्थलों को विकसित करने के लिए निजी हाथों में दें। पर्यटन स्थलों को आउट सोर्स करें, तभी इनकी सुंदरता बनी रहेगी।
आने वाले समय में शहर का गंडोला प्रोजेक्ट, रंजीत सागर डैम, कृत्रिम झील जो बन रही है, इसको भी निजी हाथों में देने की तैयारी है।