प्रदेश में पर्यटन उद्योग को 786 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिससे उल्लेखनीय उपलब्धियां देखी गई हैं। इस बार प्रदेश में 1.62 करोड़ पर्यटकों की संख्या दर्ज की गई है।
जम्मू-कश्मीर ने 75 साल के इतिहास में पहली बार 1.62 करोड़ पर्यटकों की संख्या दर्ज की गई है। सूचना और जनसंपर्क निदेशालय ने इस महीने की शुरुआत में अपनी रिपोर्ट में इसकी घोषणा की है। इससे पहले प्रदेश में औसतन लगभग 10 लाख पर्यटक आते थे।
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रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश में इस पर्यटकों के आने से विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार की संभावना बढ़ी है। अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से पर्यटन क्षेत्र में पर्याप्त बदलाव हुए हैं। प्रदेश में पर्यटन उद्योग को 786 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिससे उल्लेखनीय उपलब्धियां देखी गई हैं।
उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना के तहत 1,327 करोड़ रुपये की लागत से नए चिनाब पुल बनकर लगभाग तैयार है। अगले चार साल में इसके निर्माण के साथ कश्मीर घाटी तक रेल से पहुंचने का सपना साकार होगा। इसके आसपास एक कॉरिडोर ट्रांजिट को भी सीमित समय सीमा के भीतर पूरा करने की योजना बनाई गई है।
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केंद्र सरकार प्रदेश के लोगों के लिए बेहतर ढांचागत सुविधाएं सुनिश्चित करने और पर्यटकों को लुभाने के लिए भी महत्वपूर्ण प्रयास कर रही है। इसके परिणामस्वरूप बेहतर कानून और व्यवस्था, आशाजनक सुरक्षा प्रणाली, और बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी सुधारों के अलावा शांति बनाए रखने के साथ पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि हुई है।
सभी संभावित वैश्विक मंचों पर जम्मू, कश्मीर और लद्दाख में पर्यटन के लिए प्रचारित किया जा रहा है। हाल के वर्षों में हवाई यातायात में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। कश्मीर घाटी सबसे अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने वाला गंतव्य रहा है। घाटी के लिए सीधे अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू की गई हैं, जो पर्यटन का एक मुख्य हिस्सा हैं। श्रीनगर एयरपोर्ट से इस साल अप्रैल 2022 में रिकॉर्ड 102 उड़ानें भरी गईं। साथ ही लगभग 15,199 औसत दैनिक यात्रियों के रिकॉर्ड के साथ उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।