राजोरी-पुंछ के पीर पंजाल के पहाड़ी इलाकों में आतंकियों के दो से तीन छोटे ग्रुप सक्रिय हैं, जिनका अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। बर्फबारी और ठंड के चलते पहाड़ी इलाके में रहना संभव नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि राजोरी के ढांगरी में इन्हीं आतंकियों ने रेकी करने के बाद वारदात को अंजाम दिया है।
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां ढांगरी हमले के एक हफ्ते बाद भी जांच में जुटी हैं। राजोरी-पुंछ रेंज के डीआईजी डॉ. हसीब मुगल ने खुलासा किया था कि पीर पंजाल के पहाड़ों पर आतंकियों के दो-तीन दलों के होने की सूचना है। उनके अनुसार पुलिस व सुरक्षा एजेंसियां आतंकियों को ट्रैक कर रही हैं।
दरहाल के परगाल स्थित सैन्य कैंप पर फिदायीन हमले के बाद बुद्धल पुलिस थाने के अंतर्गत कांधरा हिल में सुरक्षा बलों का आतंकियों से सामना हुआ था, लेकिन खराब मौसम के चलते वह बच निकले थे।
मौजूदा समय में पीर पंजाल के पहाड़ों पर बर्फबारी हो रही है और इतनी ठंड में यहां रहना संभव नहीं है। ऐसे में आतंकी कश्मीर की ओर भाग गए हैं या फिर ढांगरी में वारदात को अंजाम देकर छिप गए हैं।
पुंछ के जलास सलोत्री में वीडीसी सदस्यों को दिया प्रशिक्षण
ढांगरी आतंकी हमले के बाद पुंछ के लोगों में भी दहशत है। अल्पसंख्यकों की मांग पर पुलिस की ओर से वीडीसी को सशक्त करने का काम शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में सोमवार को जिले की नियंत्रण रेखा से सटे गांव जलास एवं सलोत्री में सेना और पुलिस की ओर से प्रशिक्षण शिविर लगाया गया।
इसमें वीडीसी सदस्यों को बंदूक चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। इसमें दोनों गांवों के दर्जनों वीडीसी सदस्यों ने भाग लिया। शिविर का आयोजन पुलिस एवं सेना की 39 आरआर की तरफ से किया गया था। सेना एवं पुलिस की इस पहल का वीडीसी सदस्यों अजीत सिंह, लोकेश बाली, अंकुश बाली व मोहम्मद हमीद ने स्वागत किया है।