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जम्मू कश्मीर: किश्तवाड़-थाजवास और गुरेज में दिखे हिम तेंदुए, प्रदेश में सर्वे के लिए लगाए गए तीन सौ कैमरे

Thu, 08 Dec 2022 02:21 AM IST
विमल शर्मा अमित कुमार, जम्मू

सार

गुरेज में पिछले साल के आखिर में हिम तेंदुआ फोटोग्राफी में ट्रैप हुआ था। जम्मू कश्मीर में हिम तेंदुओं की संख्या के लिए सर्वे किया जा रहा है। इसके लिए विभिन्न स्थानों पर करीब तीन सौ अत्याधुनिक कैमरे लगाए गए हैं।
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जम्मू कश्मीर में दिखा हिम तेंदुआ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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किश्तवाड़ राष्ट्रीय उद्यान के आसपास के क्षेत्रों के साथ थाजवास (सोनामर्ग, अमरनाथ गुफा के आसपास) और गुरेज में हिम तेंदुओं (स्नो लेपर्ड) की मौजूदगी पाई गई है। किश्तवाड़ उद्यान में कैमरे में एक साथ दो तेंदुए देखे गए हैं, जिससे उनके मां बच्चे के होने की संभावना है।

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थाजवास में भी कैमरे में एक तेंदुआ आया है। गुरेज में पिछले साल के आखिर में हिम तेंदुआ फोटोग्राफी में ट्रैप हुआ था। जम्मू कश्मीर में हिम तेंदुओं की संख्या के लिए सर्वे किया जा रहा है। इसके लिए विभिन्न स्थानों पर करीब तीन सौ अत्याधुनिक कैमरे लगाए गए हैं।

कैमरा ट्रैप के अलावा बालों के नमूने, स्कैट और अन्य सबूत जुटाए जा रहे हैं। इसमें किश्तवाड़ उद्यान में जानवर के मल के कुछ नमूने लेकर बंगलूरू स्थित नेशनल सेंटर फार बायोलॉजिकल साइंसेस केंद्र में विश्लेषण के लिए भेजे गए हैं।
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जम्मू कश्मीर में नवंबर 2021 में हिम तेंदुओं की संख्या का पता लगाने के लिए सर्वे शुरू किया गया था। इस स्नो लैपर्ड प्रोजेक्ट पर 1 करोड़ 33 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जिसकी पहली किश्त 66 लाख रुपये आ गई है। इस सर्वे पर जून-जुलाई 2023 तक रिपोर्ट बनाने की योजना है।

प्रदेश में तीन स्थानों पर हिम तेंदुओं की मौजूदगी से उक्त क्षेत्रों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। किश्तवाड़ हाई एल्टीट्यूड राष्ट्रीय उद्यान 2195.50 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। हिमाचल प्रदेश में भी तीस के करीब हिम तेंदुए मिल चुके हैं, जबकि लद्दाख, सिक्किम, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश में हिम तेंदुओं की संख्या पर सर्वे चल रहा है।

हाल ही में नवंबर 2022 में किश्तवाड़ राष्ट्रीय उद्यान में नेशनल डेवलपमेंट फाउंडेशन (एनडीएफ) के कैमरे में हिम तेंदुए का फोटो लिया गया है। हिम तेंदुओं को ट्रैप करने के लिए प्रत्येक 25 स्क्वेयर किलोमीटर के दायरे में एक ग्रिड बनाया गया है, जिसमें कैमरे स्थापित हैं।

तेंदुओं की संख्या और मौजूदगी को जानने के लिए तीन स्तर पर काम किया जा रहा है, जिसमें पहला कैमरा ट्रैप, दूसरे जानवर के मल, बाल सहित अन्य नमूने जुटाना और तीसरा स्थानीय लोगों से हिम तेंदुओं की पारिस्थितिकी पर जानकारी लेना है।

कैमरा ट्रैप में एक कैमरा 2 से 3 माह तक बैटरी पर चलता है और अपने सामने आने वाले गर्म खून वाले किसी भी जानवर का खुद ही फोटो खींच लेता है। 

एशिया, चीन और रूस में भी पाया जाता है

इंटरनेशनल यूनियन फार कंजर्वेशन आफ नेचर (आईयूसीएन) में सूचीबद्ध हिम तेंदुएं ज्यादातर 3000 से 4500 मीटर के बीच की ऊंचाई पर पाए जाते हैं। यह अधिकतक उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में उच्च पर्वतीय बकरी या अन्य माल मवेशियों को अपना निशाना बनाते हैं।

हिमालय के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में हिम तेंदुआ पाया जाता है। यह मध्य एशिया, दक्षिण एशिया, चीन और रूस में भी पाया जाता है, लेकिन पारिस्थितिकी में हो रहे बदलाव से इस प्रजाति का अस्तित्व पर खतरा बढ़ा है। हिम तेंदुआ भारत में प्रजाति रिकवरी कार्यक्रम का हिस्सा है। 

सर्वे के बेहतर परिणाम मिल रहे हैं 

प्रदेश के मुख्य वन्यजीव वार्डन सुरेश कुमार गुप्ता ने बताया कि हिम तेंदुएं के सर्वे के बेहतर परिणाम मिल रहे हैं। प्रदेश के तीन स्थानों पर इनकी मौजूदगी की पुष्टि हो गई है। प्रदेश में कई बर्फ से ढके क्षेत्रों में हिम तेंदुए बसे हुए हैं।

जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन से पहले लद्दाख में हिम तेंदुओं पर सर्वे शुरू किया गया था, लेकिन यूटी बनने के बाद काम बंद हो गया था। अब लगभग एक साल के सर्वे में हिम तेंदुए देखे जा रहे हैं।

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