किश्तवाड़ राष्ट्रीय उद्यान के आसपास के क्षेत्रों के साथ थाजवास (सोनामर्ग, अमरनाथ गुफा के आसपास) और गुरेज में हिम तेंदुओं (स्नो लेपर्ड) की मौजूदगी पाई गई है। किश्तवाड़ उद्यान में कैमरे में एक साथ दो तेंदुए देखे गए हैं, जिससे उनके मां बच्चे के होने की संभावना है।
इंटरनेशनल यूनियन फार कंजर्वेशन आफ नेचर (आईयूसीएन) में सूचीबद्ध हिम तेंदुएं ज्यादातर 3000 से 4500 मीटर के बीच की ऊंचाई पर पाए जाते हैं। यह अधिकतक उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में उच्च पर्वतीय बकरी या अन्य माल मवेशियों को अपना निशाना बनाते हैं।
हिमालय के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में हिम तेंदुआ पाया जाता है। यह मध्य एशिया, दक्षिण एशिया, चीन और रूस में भी पाया जाता है, लेकिन पारिस्थितिकी में हो रहे बदलाव से इस प्रजाति का अस्तित्व पर खतरा बढ़ा है। हिम तेंदुआ भारत में प्रजाति रिकवरी कार्यक्रम का हिस्सा है।
प्रदेश के मुख्य वन्यजीव वार्डन सुरेश कुमार गुप्ता ने बताया कि हिम तेंदुएं के सर्वे के बेहतर परिणाम मिल रहे हैं। प्रदेश के तीन स्थानों पर इनकी मौजूदगी की पुष्टि हो गई है। प्रदेश में कई बर्फ से ढके क्षेत्रों में हिम तेंदुए बसे हुए हैं।
जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन से पहले लद्दाख में हिम तेंदुओं पर सर्वे शुरू किया गया था, लेकिन यूटी बनने के बाद काम बंद हो गया था। अब लगभग एक साल के सर्वे में हिम तेंदुए देखे जा रहे हैं।