जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक माड्यूल का पर्दाफाश करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, इस माड्यूल का पर्दाफाश करने के साथ नेशनल हाईवे और मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के चडूरा में हुए चार आतंकी हमलों की गुत्थी सुलझा ली गई है।
पुलिस ने आतंकियों के छह मददगारों को गिरफ्तार किया। उनके पास से तीन कारें और तीन मोटरसाइकिल जब्त की गईं। बताया जाता है कि इन वाहनों का इस्तेमाल आतंकियों को लाने और ले जाने के लिए किया जाता रहा है।
कश्मीर संभाग के आईजीपी विजय कुमार ने कहा कि करीब दो महीने पहले उत्तरी कश्मीर के हंदवाड़ा में लश्कर का एक विदेशी आतंकी सैफुल्ला श्रीनगर और बडगाम के इलाके में सक्रिय हुआ था और आते ही लगातार चार हमलों को अंजाम दिया। सबसे पहले 14 अगस्त को गुलशन नगर नौगाम में एसएसबी और पुलिस की ज्वाइंट नाका पार्टी पर हमला किया।
इस दौरान दो पुलिस के जवान शहीद हुए थे। उसके बाद हाईवे पर 110 बटालियन सीआरपीएफ की आरओपी पर अटैक किया था। बाद में 25 सितंबर को चडूरा में सीआरपीएफ पर हमला किया, इसमें एएसआई शहीद हुए थे। आईजी ने बताया कि इस मॉड्यूल की हिम्मत बढ़ती गई और पांच अक्तूबर को एक बार फिर सीआरपीएफ पर हमला किया और दो जवान शहीद हो गए।
आईजी ने बताया कि इन हमलों के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 3-4 विशेष टीमों का गठन किया। इन टीमों ने 10-15 संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की, जिनकी निशानदेही पर हाल ही में बरजुल्ला के इलाके में एक मुठभेड़ को अंजाम दिया गया। इसमें सैफुल्ला और पुलवामा का एक स्थानीय आतंकी इरशाद मारा गया। इसके बाद लश्कर के छह समर्थकों को पकड़ने में कामयाबी मिली। इन सब हमलों के पीछे यही शामिल थे।
आईजीपी ने कहा कि पकड़े गए 6 मददगार लश्कर आतंकियों के हार्डकोर एसोसिएट हैं। गिरफ्तार किए गए मददगारों की शिनाख्त छत्तरगाम चडूरा के वसीम अहमद गनई पुत्र अब्दुल रशीद गनई, सुहेल शबीर गनई पुत्र शबीर अहमद गनई, आरीबाग श्रीनगर के फैसल मुश्ताफ गनई पुत्र मुश्ताक अहमद गनई और साहिल निसार पुत्र निसार अहमद गनई, काकपोरा पुलवामा के शाकिर अहमद डार पुत्र अली मोहम्मद डार और वानबल श्रीनगर के उमर निसार पुत्र निसार अहमद शेख के तौर पर हुई है।
पुलिस ने ऐसे पकड़ा मॉड्यूल
आतंकियों द्वारा बॉडी कैमरे का इस्तेमाल ही इस मॉड्यूल और पाकिस्तानी आतंकी सैफुल्ला के लिए काल साबित हुआ। आईजी ने बताया कि चडूरा में अंजाम दिये गए दूसरे आतंकी हमले के दौरान एक बॉडी कैमरा मिला, जिससे सुराग हाथ लगे और यह पता चल गया कि एक पाकिस्तानी सैफुल्ला है। उसकी शिनाख्त होने के बाद उसका नाम आदि भी पता चल गया।