दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में आईजी और डीआईजी स्तर के पद तक खाली हैं। आलम यह है कि एडीजीपी बने अफसरों को आईजी स्तर का काम देखना पड़ रहा है। कई अफसरों पर अपने पद के अलावा दो से तीन अतिरिक्त पदों का कार्यभार है। अफसरों की कमी को पूरा करने के लिए सरकार आईपीएस अफसरों को समय से पहले पदोन्नत करने की भी योजना बना चुकी है।
आईजी के सात, डीआईजी के आठ पद खाली
प्रदेश में सिर्फ तीन आईजी हैं। आईजी कश्मीर, आईजी यातायात पुलिस और एक आईजी डेपुटेशन पर हैं। आईजी कश्मीर के पास आर्म्ड पुलिस कश्मीर का अतिरिक्त पदभार है। आईजी यातायात पुलिस के पास आईजी पुलिस मुख्यालय का पदभार भी है। पुलिस की सीआईडी, सिक्योरिटी, एसएसजी, सिविल डिफेंस, क्राइम ब्रांच , रेलवे पुलिस, तकनीकी विंग, पुलिस अकादमी, पुलिस वेलफेयर को आईजी लीड करते हैं, लेकिन यह काम एडीजीपी देख रहे हैं। डीआईजी के भी आठ पद खाली हैं।
इन अधिकारियों के पास अतिरिक्त पदभार
आईपीएस दीपक कुमार के पास जेल विभाग के डीजी के अलावा क्राइम के स्पेशल डीजी का अतिरिक्त पदभार है। एसजेएम जिलानी के पास रेलवे के अलावा पुलिस हाउसिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन के एमडी का अतिरिक्त पदभार, एमके सिन्हा के पास एडीजी कोआर्डिनेशन के अलावा सिक्योरिटी विंग, एसएसजी, विजय कुमार के पास एडीजीपी आर्म्ड के अलावा सिक्योरिटी, एसडीआरएफ और होमगार्ड, विधि कुमार विरदी के पास आईजी कश्मीर के अलावा आईजी आर्म्ड कश्मीर, भीमसेन टूटी के पास आईजी मुख्यालय के अलावा आईजी यातायात पुलिस का अतिरिक्त पदभार है।