श्रम कल्याण बोर्ड से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को तीन वर्षों से शिक्षा के लिए मिलने वाली वित्तीय मदद नहीं मिली है। सबसे ज्यादा लंबित मामले जम्मू जिले में हैं। जहां वर्ष 2019-20, 2020-21 और 2021-22 के लिए शिक्षा में वित्तीय सहायता से संबंधित मामले लंबित पड़े हैं, जिनकी संख्या छह हजार तक है, जिनमें मामूली गलती होने या कोई दस्तावेज जमा नहीं करने वाले मामले सबसे ज्यादा हैं।
श्रम कल्याण बोर्ड से वित्तीय मदद के लिए पंजीकृत निर्माण श्रमिकों ने आवेदन किए थे। आवेदन करने के बावजूद भी उन्हें वित्तीय मदद नहीं मिली है। इसमें ज्यादातर ऐसे मामले हैं जिनके आवेदन में मामूली गलती है। भारतीय मजदूर संघ के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक चौधरी ने कहा कि आवेदन में छोटी सी गलती होने पर आवेदन को रोक दिया जाता है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर श्रमिक अशिक्षित होते हैं और उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं रहती है। हमने इस संबंध में बोर्ड और श्रम आयुक्त को पत्र भी लिखा है, लेकिन, कोई पहल नहीं हुई है। पंजीकृत श्रमिकों को बच्चों की शिक्षा के लिए वित्तीय मदद एक हजार से 25 सौ रुपये तक होती है।
पिछले साल बोर्ड में 65,512 नए पंजीकरण हुए हैं। 2019 में बोर्ड के साथ 1.76 लाख श्रमिक पंजीकृत थे, जो 2022 तक 3.25 लाख तक पहुंच गए हैं। पिछले वर्ष बोर्ड ने विभिन्न सहायता के तहत 1.70 करोड़ रुपये आवंटित किया है। इसमें 94 करोड़ रुपये शिक्षा सहायता के रूप में हैं।
जल्द मंजूरी मिलेगी
2019-2020 में 6272 मामलों को स्वीकृत कर 4.5 करोड़ जारी किए हैं। 2020-21 में 1824 मामलों में 2.93 करोड़ रुपये जारी किए गए। सिर्फ 2021-22 के 1017 मामले लंबित हैं। बोर्ड में चेयरमैन का पद रिक्त होने से यह मामले लंबित हैं, जिन्हें जल्द मंजूरी मिलेगी।
- मुनीर-उल-इस्लाम, सीईओ, श्रम कल्याण बोर्ड।