एसआरओ 236 का हुआ जमकर विरोध
कर्मचारियों के विरोध के बाद एसआरओ 236 साल 2005 में जारी हुआ। इसमें अस्थायी कर्मचारियों को डेली नीड बेस कर्मचारी की संज्ञा दी गई। इस एसआरओ का भी कर्मचारियों ने जमकर विरोध किया। इसके बाद नियमितीकरण प्रक्रिया रुकी रही।
एसआरओ 520 : मंजूरी के लिए भेजा तो सरकार गिर गई
2016 में एसआरओ 520 जारी किया गया। इसमें पांच साल सेवा होने पर पांच हजार, दस साल पर दस हजार जबकि 15 साल सेवाएं देने पर 15000 वेतन बढ़ने की प्रक्रिया आरंभ हुई।इसके बाद विभागों में कर्मचारियों की सूची को अपडेट किया गया और इसे मंजूरी के लिए भेजा गया तो 2018 सरकार गिर गई। इसके बाद राज्य को यूटी बनाया गया। इससे पहले के तमाम एसआरओ पर कार्रवाई रुक गई। यहां पर गिनती में कर्मचारी लाभ ले पाए। इस कारण प्रदेशभर से 61 हजार कर्मचारियों को कम मानदेय में काम करना पड़ रहा है। यूटी बनने के पांच साल बाद भी मात्र 11 रुपये मानदेय बढ़ाकर कर्मचारियों को चुप करवा दिया गया।
कर्मचारियों को नियमित करने के लिए नीति बनाई जाए
पीएचई इंप्लाइज यूनाइटेड फ्रंट के पदाधिकारी रवि हंस ने कहा कि एसआरओ पर एसआरओ जारी हुए मगर लाभ नहीं मिल पाया। यूटी बनने के बाद हालत खराब हो गई है। महज 11 रुपये मानदेय बढ़ा है। यूटी की तर्ज पर वेतन दिया जाना चाहिए था मगर ऐसा नहीं हुआ है। प्रदर्शन लगातार जारी है। मांग के बावजूद भी नया एसआरओ या आदेश जारी नहीं हुआ है।
पदाधिकारी राजेंद्र सिंह ताज ने कहा कि एसआरओ का लाभ चुनिंदा कर्मचारियों को ही मिला है। एसआरओ जारी होते रहे हैं। बाद में इन्हें रद्द कर दिया गया। हजारों कर्मचारी कम मानदेय में ही काम कर रहे हैं। इरीगेशन डेलीवेजर कर्मचारी यूनियन के उपप्रधान जय पाल शर्मा ने कहा कि सरकार को सोचना चाहिए। तभी कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित होगा। लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित किया जाए। इस पर नीति बननी चाहिए।
मसला उच्च अधिकारियों के ध्यान में है। दिशा निर्देशों के तहत कर्मचारियों का रिकार्ड सचिवालय को भेजा गया है। जो आदेश आएगा, उस पर कार्रवाई होगी। -संदीप डोगरा, अधीक्षण अभियंता, जल शक्ति विभाग