अखनूर की एलओसी पर आतंकवादी पिछले हमलों की तरह ही नुकसान पहुंचाना चाहते थे, लेकिन उनकी योजना आधी अधूरी रह गई। सूत्रों के अनुसार, आतंकियों को हमला करने से पहले किसी से फोन पर बात करनी थी, जो संभवतः स्थानीय गाइड या सीमा पार बैठा हैंडलर हो सकता है।
अखनूर की एलओसी पर आतंकी पिछले हमलों की तरह ही नुकसान पहुंचाना चाहते थे। ठीक वैसे ही जैसे पूर्व में कठुआ, डोडा, पुंछ के भट्टादुड़ियां, कश्मीर के बारामुला में किया गया, लेकिन आधी अधूरी योजना से आतंकी ऐसा करने से चूक गए। सूत्रों का कहना है कि हमला करने से पहले आतंकियों को किसी से फोन पर बात करनी थी। ये संभवत: कोई स्थानीय गाइड या फिर सीमा पार बैठा हैंडलर हो सकता है। बात करने के लिए आतंकियों को एक मोबाइल फोन चाहिए था। मोबाइल की तलाश में ही आतंकी मंदिर में घुसे, लेकिन मंदिर में उन्हें बच्चे मिले, जिनके पास मोबाइल फोन नहीं था।
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यहीं कारण है कि आतंकियों की फायरिंग सिर्फ सेना के काफिले में शामिल आखिर वाले एंबुलेंस वाहन तक ही हुई। जब तक सेना का काफिला उनके नजदीक पहुंचता, तब तक उनकी हद में एंबुलेंस ही आई। बताया जा रहा है कि मंदिर में घुसने और वहां से जाते वक्त आतंकियों ने एक मूर्ति को भी खंडित कर दिया।