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Jammu News: सामूहिक दुष्कर्म मामले में एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज

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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय ने सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग संबंधी याचिका खारिज कर दी। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि दुष्कर्म केवल पीड़िता के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज के खिलाफ भी एक अपराध है।
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याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति विनोद चटर्जी कौल की पीठ ने कहा कि कोर्ट की अंतर्निहित शक्ति का उपयोग ऐसे जघन्य अपराधों में एफआईआर रद्द करने के लिए नहीं किया जा सकता, जो समाज पर गंभीर प्रभाव डालते हैं और निजी स्वार्थ से परे होते हैं।

सरकार के अनुसार, 19 जुलाई 2021 को उड़ी पुलिस थाने में एक लिखित शिकायत मिली थी। इसके बाद एफआईआर संख्या 70/2021 दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पाया गया कि आरोपी सैयद इम्तियाज़ हुसैन ने अपने भाइयों के साथ मिलकर महिला का अपहरण कर लिया था। महिला को आरोपी के कब्जे से उड़ी के एनएस ब्रिज से बरामद किया गया। बयान में पीड़िता ने कहा था कि आरोपियों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया है। इसके बाद दुष्कर्म, उत्पीड़न और आपराधिक धमकी जैसे अपराध जोड़े गए।
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आरोपी ने यह दावा किया कि उसने महिला से उसकी इच्छा और सहमति से 28 जुलाई 2021 को शादी की थी। अदालत ने कहा, समझौते को अदालत की विवेकशीलता के अनुसार संतुष्ट करना आवश्यक है। हत्या, दुष्कर्म, डकैती आदि समझौते का कोई कानूनी समर्थन नहीं होता। अदालत ने यह भी कहा कि दुष्कर्म केवल पीड़िता के खिलाफ अपराध नहीं होता, बल्कि यह समाज के खिलाफ भी है। उन्होंने कहा, भारत जैसे देश में, जहां धार्मिक प्रथाएं महिलाओं को देवी के रूप में पूजा करती हैं, अदालत को उनकी मानसिक और शारीरिक अखंडता का सम्मान करना चाहिए। अदालत ने कहा कि इस तरह के गंभीर अपराधों में समझौते को आधार बनाकर एफआईआर रद्द करना उचित नहीं है। इसके बाद याचिका को खारिज कर दिया।
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