बांदीपोरा। शेर ए कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (स्कॉस्ट) कश्मीर ने संभावित फसलों पर इज़मर्ग गुरेज में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया।
आदिवासी किसानों के बीच विरासत और संभावित फसलों में सुधार और बढ़ावा देने के लिए आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ ही 43 प्रगतिशील आदिवासी किसानों ने भी भाग लिया। उन्हें खेती की आधुनिक तकनीक के बारे में जागरूक किया।
इस दौरान दलहन पर एआईसीआरपी के प्रोफेसर और प्रधान अन्वेषक डॉ. एजाज अहमद लोन ने पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने, आय बढ़ाने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने में बकव्हीट जैसी संभावित फसलों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने ऐसी फसलों में घटती रुचि पर चिंता जाहिर करते हुए गुणवत्तापूर्ण बीज वितरण और वैज्ञानिक प्रशिक्षण से किसानों को जागरूक करने पर जोर दिया। डीएआरएस रंगरेथ के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. फैयाज अहमद बहार ने गुरेज की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी लुप्त हो रही फसलों को पुनर्जीवित करने के लिए एसकेयूएएसटी-के में वैज्ञानिक समुदाय के प्रयासों के बारे में बताया। केवीके और एमएआरएंडईएस गुरेज के प्रमुख डॉ. हिलाल अहमद मलिक ने बताया कि बडुगाम तुलैल में 7.5 हेक्टेयर आलू के बीज उत्पादन के तहत लाया गया है, जिसका लक्ष्य इस साल 3,000 क्विंटल और अगले साल 30,000 क्विंटल उत्पादन करना है। बताया कि गुरेज में 16 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को केजी-2 मक्का के तहत कवर किया गया है। डांगन (इज़मर्ग) गांव को बकव्हीट की खेती के लिए कवर किया गया है।
डॉ. हिलाल ने एचएडीपी-9 के तहत एक कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना की भी घोषणा की और डीएआरएस रंगरेथ के निरंतर समर्थन की सराहना की। इस दौरान किसानों को प्राकृतिक खेती के तरीकों का समर्थन करने के लिए मुफ्त में टूलकिट और तिरपाल शीट प्रदान की गईं।