श्रीनगर। जल संकट, आसमान छूती बिजली की कीमतों, बेरोजगारी दर और राजनीतिक कैदियों के मामले में मंगलवार को पीडीपी मुख्यालय से लाल चौक तक प्रदर्शन होना था। पुलिस और प्रशासन ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी और बड़े नेताओं से कार्यकर्ताओं तक जो भी यहां आया हिरासत में ले लिया गया। इस दौरान नेकां सरकार और उमर के खिलाफ नारे लगते रहे।
पीडीपी के मुख्यालय को सुबह से ही पुलिस ने घेर रखा था। 10 बजते-बजते कार्यकर्ता और नेता आने शुरू हुए तो सभी को हिरासत में लेकर थाने भेज दिया गया। किसी को भी आसपास रुकने नहीं दिया जा रहा था। कुछ कार्यकर्ताओं ने पुलिस की नजर बचाकर पार्क से थोड़ी दूर प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू की तो उन्हें भी हिरासत में ले लिया गया। करीब डेढ़ घंटे तक यही चला।
महासचिव अब्दुल हक खान, मोहम्मद खुर्शीद आलम, पूर्व मंत्री गनी नबी लोन हंजूरा, सैयद बशारत बुखारी, जहूर अहमद मीर, प्रवक्ता एम इकबाल ट्रंबू, शौकिया कुरैशी, पूर्व विधायक मोहम्मद यूसुफ भट, शेख नूर मोहम्मद, गुलजार अहमद वानी, जिला अध्यक्ष श्रीनगर अब्दुल कयूम भट, जिला अध्यक्ष बडगाम मोहम्मद यासीन भट, जिला अध्यक्ष बांदीपोरा सैयद सज्जाद, जिला अध्यक्ष कुपवाड़ा मोहम्मद अफजल वानी, डीवी खुर्शीद शाह, आरिफ लैगारू, जिला अध्यक्ष महिला विंग श्रीनगर सारा नईमा, जिला अध्यक्ष महिला विंग बडगाम तबस्सुम, शेख सबा और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
शासन की विफलताएं बताना भी जुर्म बना
प्रदर्शन रोकने के बाद पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने एक्स पर कहा कि ऐसा लगता है कि प्रशासन अपनी ताकत का इस्तेमाल सिर्फ पीडीपी के विरोध प्रदर्शनों को विफल करने और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने के लिए करता है। काश यही ताकत और तत्परता जल संकट, आसमान छूती बिजली कीमतों, 17.4% की खतरनाक बेरोजगारी दर और राजनीतिक कैदियों के अनसुलझे मुद्दे को हल करने के लिए इस्तेमाल की जाती। हमने देखा है कि जब हमने अनुच्छेद 370 को बिना शर्त खत्म करने और मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ़ आवाज़ उठाई तो हमारे विरोध को दबा दिया गया। अब शासन की विफलताओं पर चिंता जताना भी दंडनीय कृत्य बन गया है।