श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में निजी स्कूलों द्वारा बस शुल्क वसूलने के मामले में शुल्क निर्धारण समिति (एफएफआरसी) की तरफ से कोई कार्रवाई न किए जाने पर अभिभावकों ने चिंता व्यक्त की है। अभिभावकों ने कहा कि स्कूल प्रबंधन निर्धारित मानदंडों का उल्लंघन करते हुए दूरी की परवाह किए बिना परिवहन शुल्क वसूल रहे हैं। एफएफआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) हाली ने बताया कि जब तक अभिभावकों की ओर से औपचारिक शिकायत नहीं मिलती, वे कोई कार्रवाई नहीं करेंगे।
सौरा के एक अभिभावक अरशद भट ने कहा, मैं सौरा में रहता हूं और मेरे बच्चे को पंथा चौक पहुंचना है, जिसके लिए स्कूल 4,000 रुपये वसूल करते हैं, जबकि अन्य स्कूल इससे कम पैसे लेते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को स्कूलों के लिए एक मानकीकृत दर सूची जारी करनी चाहिए थी।
एक अन्य अभिभावक ने सर्दियों की छुट्टियों के दौरान बस शुल्क वसूलने के पीछे औचित्य पर सवाल उठाया। कहा, एफएफसी क्या कर रही है। जब छात्र घर पर हैं, तो उन्होंने 50 प्रतिशत बस शुल्क क्यों तय किया है? यह अस्वीकार्य और अतार्किक है। अभिभावकों ने सरकार से परिवहन शुल्क वसूलने के संबंध में स्कूलों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया।
एफएफआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) हाली ने बताया कि जब तक अभिभावकों की ओर से औपचारिक शिकायत नहीं मिलती, वे कोई कार्रवाई नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, यदि अभिभावक औपचारिक रूप से अपनी शिकायत दर्ज कराते हैं, तो समिति आवेदनों की समीक्षा करेगी और उनकी चिंताओं का समाधान करेगी। एफएफआरसी के अध्यक्ष ने कहा कि तदनुसार गलती करने वाले स्कूल को नोटिस जारी किए जाएंगे। इसके बाद कार्रवाई होगी।
शीतकालीन अवकाश के लिए तय किए गए 50 प्रतिशत बस शुल्क के बारे में हाली ने स्वीकार किया कि अवकाश के दौरान बच्चे स्कूल नहीं जा रहे थे, लेकिन स्कूल का संचालन जारी है। उन्होंने कहा, बसें अभी भी चल रही हैं, यह केवल ईंधन की लागत का मामला नहीं है, बल्कि रखरखाव, ड्राइवरों का वेतन और अन्य खर्च भी हैं। बसों को सेवा से बाहर नहीं रखा जा सकता है और इस अवधि के दौरान ड्राइवरों को नहीं छोड़ा जा सकता है। उन्होंने सर्दियों की छुट्टियों के दौरान 50 प्रतिशत परिवहन शुल्क वसूले जाने को उचित ठहराते हुए कहा कि स्कूलों को ड्राइवरों को भुगतान करना पड़ता है, जिसके लिए इन लागतों को पूरा करने के लिए शुल्क आवश्यक है।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने जम्मू-कश्मीर में निजी स्कूलों की फीस संरचना की निगरानी और निर्धारण करने के लिए एफएफआरसी का गठन किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे नियमों का उल्लंघन करते हुए छात्रों से अत्यधिक शुल्क की मांग न करें।