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Jammu News: विशेष दर्जे की बहाली के प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस पहले असमंजस में दिखी

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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा की कार्यवाही के दौरान बुधवार को पूर्ववर्ती राज्य के विशेष दर्जे की बहाली के लिए केंद्र और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की मांग वाला प्रस्ताव पेश किये जाने वक़्त कांग्रेस का रवैया कुछ असमंजस भरा रहा। न तो कांग्रेस के विधायक खुल कर समर्थन में उठे और न ही इसका विरोध करते दिखाई दिए।
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जब भाजपा विधायकों द्वारा प्रस्ताव का विरोध किया जा रहा था, उस समय पीरजादा मोहम्मद सैयद सदन से बाहर जाते दिखाई दिए। कांग्रेस अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा अपनी सीट पर बैठे रहे। इस दौरान विधायक निजामुद्दीन भट ने अपनी सीट पर खड़े होकर कहा, भाजपा सदस्यों ने सदन का अपमान और नियमों का उल्लंघन किया है। हर सदस्य को इस पर बोलने का अधिकार है, लेकिन इस बीच हंगामा जारी रहा और आखिरकार सदन की कार्यवाही को एक दिन के लिए स्थगित कर दिया गया।
सदन के बाहर जब भट से यह पूछा गया कि वह प्रस्ताव के समर्थन में हैं या नहीं। इस पर उन्होंने कहा, यह हां या ना की बात नहीं है। मैंने पहले ही कहा, प्रस्ताव का सम्मान किया जाना चाहिए। हम कहते हैं कि बातचीत होने दें, नई दिल्ली को इस पर अपना रुख अपनाने दें। जब इरफान हफ़ीज़ लोन से पूछा गया तो सदन के बाहर उन्होंने कहा, उस पर हमारे प्रवक्ता ही आपको बताएंगे।
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वहीं बाद में कांग्रेस के रुख को लेकर अटकलें लगाए जाने के बाद कांग्रेस के अध्यक्ष ने एक प्रेस कांफ्रेंस बुलाई। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने कहा, जम्मू-कश्मीर विधानसभा का प्रस्ताव जम्मू-कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं को दर्शाता है। कांग्रेस पार्टी जम्मू-कश्मीर विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव का स्वागत करती है, जिसमें जम्मू-कश्मीर के लोगों के सांविधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली की मांग की गई है, जिसमें सभी सांविधानिक गारंटी के साथ पूर्ण सशक्त राज्य का दर्जा शामिल है।
उन्होंने कहा, सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद यह जम्मू-कश्मीर के लोगों की पहली लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति है जो लोगों की आकांक्षाओं को दर्शाती है। केंद्र सरकार के पास जम्मू-कश्मीर के लोगों को उन अधिकारों और सुरक्षा से वंचित करने का कोई कारण नहीं होना चाहिए जो देश के कई अन्य हिस्सों में पहले से ही प्रचलित हैं। कांग्रेस जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दिलाने और वहां के लोगों के भूमि, रोजगार, प्राकृतिक संसाधनों और इसकी अनूठी सांस्कृतिक पहचान के अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रस्ताव का भाजपा द्वारा विरोध यह स्पष्ट करता है कि उनके राजनीतिक हित न केवल जम्मू-कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं के साथ टकराव में हैं बल्कि उनकी एकमात्र प्राथमिकता भी हैं चाहे इसके लिए कोई भी कीमत चुकानी पड़े।
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