जम्मू। टीबी के मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। नवंबर के शुरू से उन्हें अब मासिक निक्षय पोषण सहायता के रूप में 500 रुपये के बजाय 1000 हजार रुपये मिलेंगे। इसका उद्देश्य पीड़ितों को पौष्टिक आहार क्षेत्र को मजबूत बनाकर उन्हें टीबी जैसी संक्रमित बीमारी से लड़ने के लिए शारीरिक रूप से मजबूत बनाना है। जम्मू कश्मीर में हर साल दस हजार से अधिक टीबी के मामले मिल रहे हैं, जिनमें 7500 से 8000 तक मामले जम्मू संभाग से होते हैं।
सरकारी चिकित्सा केंद्रों पर टीबी का उपचार ले रहे पीड़ितों को पहले मासिक पोषण सहायता में 500 रुपये दिए जा रहे थे जो अब दोगुने कर दिए गए हैं। जम्मू कश्मीर में वर्ष 2018-19 में 11345, 2019-20 में 12895, 2020-21 में 11860 टीबी के मामले मिले थे। जम्मू संभाग की बात करें तो यहां वर्ष 2020 में 5982 और 2024 में अब तक 7126 मामले मिल चुके हैं, यानी टीबी मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। इसका बड़ा कारण जागरूकता बढ़ने के साथ पीड़ित तक पहुंच बढ़ाई गई है, ताकि उन्हें जल्द उपचार पर लाकर समाज में टीबी संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
स्टेट ट्यूबर क्लोसीस अधिकारी जम्मू डाॅ. ज्योति जाली का कहना है कि टीबी परीक्षण बढ़ने से ये अधिक रिपोर्ट हो रहे हैं जो अच्छा संकेत है। इससे पीड़ितों की संबंधित चिकित्सा केंद्रों पर तुरंत चिकित्सा शुरू की जाती है। पीड़ित का मुख्य रूप से बलगम परीक्षण किया जाता है, जिसके लिए संभाग के चिकित्सा केंद्रों पर 41 ट्रूनेट और 8 सीबीनेट मशीनें उपलब्ध हैं। सभी जिला स्तर परीक्षण की सुविधा उपलब्ध है। जम्मू संभाग को छह जिलों में टीबी में बांटा गया है। जिसमें जम्मू और सांबा एक और डोडा, किश्तवाड़ और रामबन एक और बाकी अन्य जिले शामिल हैं। विभिन्न संस्थानों की मदद से पीड़ितों को वित्तीय पोषण किट्स मुहैया करवाई जा रही हैं। जम्मू संभाग में प्रति एक लाख की आबादी पर 131 टीबी के मामले मिल रहे हैं जो राष्ट्रीय औसत दर 199 से कम हैं।
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कश्मीर के पांच जिले टीबी मुक्त
एसटीओ कश्मीर डा. अदोफर का दावा है कि कश्मीर में टीबी उन्मूलन में सुधार हुआ है। भारत में सबसे अधिक टीबी मुक्त जिला कश्मीर से हैं। यहां दस राजस्व जिलों में टीबी रोकथाम कार्यक्रम चल रहा है। बड़गाम को वर्ष 2021 में टीबी मुक्त घोषित किया गया था। इसके बाद 2022 में अनंतनाग को स्वर्ण, पुलवामा को स्वर्ण, कुपवाड़ा को स्वर्ण और बारामुला जिला को कांस्य पदक की श्रेणी में लिया गया। पिछले साल 2023 के सर्वे में अनंतनाग को टीबी मुक्त घोषित किया गया, यह फुल एनटीईपीटी जिला बना। इस जिले में अनंतनाग के साथ कुलगाम शामिल है। इसी तरह पुलवामा और शोपियां भी टीबी मुक्त की श्रेणी में हैं। श्रीनगर को स्वर्ण श्रेणी में लाया गया है। पूरे यूटी को टीबी बेहतर रोकथाम के लिए कांस्य श्रेणी में लाया गया है। कश्मीर के पांच राजस्व जिले टीबी मुक्त हैं, जो टीबी उन्मूलन के मानकों पर खरे उतरे हैं।
एक पीड़ित दस को संक्रमित कर सकता
माइको बैक्टीरियम ट्यूबर क्लोसीस नामक बैक्टीरिया मानव को टीबी से पीड़ित करता है। एक टीबी मरीज से आसपास के दस लोगों को संक्रमण देने का खतरा रहता है। इसमें शारीरिक रूप से कमजोर लोग अधिक चपेट में आते हैं।
लक्षण
1. तीन हफ्ते तक नियमित खांसी होना
2. शाम के साथ हल्का बुखार रहना
3. वजन गिरना और चलने पर सांस फूलना
4. धीरे धीरे भूख कम होना
5. खांसी या बलगम के साथ खून आना
-कारण
धूम्रपान और नशीले पदार्थों का सेवन करना
खानपान ठीक से न होना
शरीर में पौष्टिक आहार की कमी रहना
टीबी को लेकर जागरूकता का अभाव, देरी से इलाज लेना
टीबी के लक्षणों को नजरअंदाज करना