परगवाल। अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे परगवाल क्षेत्र में इन दिनों किसान अपनी गेहूं की फसल को जंगली मवेशियों से बचाने के लिए दिन-रात पहरेदारी कर रहे हैं।
किसानों के अनुसार, मवेशियों का झुंड दरिया के बीच बने टापुओं से निकलकर रात के अंधेरे में खेतों की ओर आ जाता है। देखते ही देखते ये झुंड गेहूं की तैयार फसल पर धावा बोल देता है और कुछ ही घंटों में नुकसान पहुंचाकर चला जाता है।
अब स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने सामूहिक पहरेदारी शुरू कर दी है। दिन हो या रात, किसान बारी-बारी से खेतों में डेरा डाले हुये हैं। टॉर्च, डंडों के साथ मवेशियों को खेतों से दूर रखने की कोशिश की जा रही है। कुछ स्थानों पर अस्थायी बाड़बंदी भी की गई है, ताकि मवेशियों को आने से रोका जा सके।
किसानों का कहना है कि पहरेदारी से काफी हद तक कामयाबी जरूर मिली है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान अभी भी जरूरी है। उनका मानना है की प्रशासन को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिएं ताकि किसानों की मेहनत सुरक्षित रह सके और उन्हें बार-बार नुकसान न झेलना पड़े।
गांव सजवाल, गवाढ़ और नरसिंहपुर के पास रात को दरिया चिनाब के किनारे कुछ किसान टार्च की रोशनी से खेतों की रखवाली करते हुए मिले। पूछने पर बताया कि यह रोज का काम है। पहले फसल लगाओ फिर उसके चौकीदार बन जाओ। किसानों ने बताया कि पचास से सत्तर लावारिस पशुओं का झुंड दरिया चिनाब के बीच बने टापू से निकलता है और थोड़ी देर में ही पूरे खेत को तबाह कर वापस चला जाता हैं। रात को फसल की पहरेदारी करना मजबूरी है।
रखवाली कर रहे किसान वारी सिंह, सुभाष सिंह, बहादुर सिंह, कालू राम ने बताया कि पूरी रात दरिया चिनाब के पास खड़े रहकर रखवाली करनी पड़ती है। कई बार तो ठंड लगने से बीमार भी हो चुके हैं लेकिन फसल को बचाने की चुनौती है। अगर फसल नहीं बचेगी तो गुजारा कैसे होगा। किसानों की समस्या किसी को दिखाई नहीं देती।