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Jammu News: दूध के कारोबार से आत्मनिर्भर बन रहीं सांबा की महिलाएं, डेयरी व्यवसाय से बढ़ रही आय

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सोसायटियों की मदद से बैंकों से लिया ऋण, अब पशुपालन और दूध उत्पादन को बढ़ा रहीं
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं डेयरी व्यवसाय से जुड़ कर आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। कई महिलाएं दूध संग्रहण और बिक्री का काम कर अच्छी आमदनी अर्जित कर रही हैं। महिलाओं की ओर से संचालित डेयरी सोसायटियां न केवल परिवार की आय बढ़ा रही हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा कर रही हैं।

मदवाल गांव की मनीषा ने बताया कि उन्होंने सामाजिक संस्था उम्मीद के सहयोग से बैंक से ऋण लेकर डेयरी व्यवसाय की शुरुआत की थी। वर्तमान में उनकी सोसायटी में सभी सदस्य महिलाएं हैं। डेयरी से दूध एकत्रित करने के बाद मशीन के माध्यम से उसकी गुणवत्ता और डिग्री मापी जाती है तथा उसे जम्मू-कश्मीर मिल्क प्रोड्यूसर्स कोऑपरेटिव सोसायटी को बेचा जाता है।
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सारथी गांव की वंदना ने बताया कि बैंक से ऋण प्राप्त कर उन्होंने डेयरी कारोबार शुरू किया था। वह घरेलू कार्यों के साथ-साथ डेयरी का संचालन भी कर रही हैं। उनकी सोसायटी में करीब 50 महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो पशुपालन और दूध उत्पादन के माध्यम से अपनी आजीविका मजबूत कर रही हैं।

वहीं, पंजगराई गांव से जुड़ी अमृती देवी ने बताया कि सोसायटी को दूध की गुणवत्ता जांचने के लिए विशेष मशीन उपलब्ध कराई गई है। महिलाएं गांवों से दूध एकत्रित कर उसे जम्मू-कश्मीर मिल्क प्रोड्यूसर्स कोऑपरेटिव सोसायटी को बेचती हैं। इस कार्य से दो लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार भी मिला है। महिलाओं का कहना है कि पशुपालन विभाग की ओर से उन्हें निरंतर सहयोग मिल रहा है। विभाग समय-समय पर पशुओं की स्वास्थ्य जांच और आवश्यक मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराता है, जिससे दूध उत्पादन की गुणवत्ता बनी रहती है।

वर्जन
रियाल में 20 हजार लीटर दूध भंडारण की क्षमता वाले केंद्र स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा, शेरपुर में भी नया स्टोरेज केंद्र विकसित किया गया है। इसमें 15 हजार लीटर दूध को स्टोर किया जा सकता है। वर्तमान में जिले में प्रतिदिन लगभग 10 हजार लीटर दूध का संग्रहण किया जा रहा है। - मुश्ताक अहमद, क्षेत्रीय अधिकारी, जेकेएमपीसीएल जम्मू

जिले में अब तक 120 डेयरी सोसायटियां गठित की जा चुकी हैं। इनमें लगभग 80 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। प्रत्येक सोसायटी में करीब 25 महिला सदस्य हैं, जो दूध उत्पादन और विपणन के कार्य से जुड़ी हुई हैं। दूध संग्रहण को सुगम बनाने के लिए सोसायटियों को वाहन भी उपलब्ध कराए गए हैं। - ज्योति काटल, जिला प्रभारी, जेकेएमपीसीएस सांबा
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पशुपालन विभाग की ओर से डेयरी उत्पादकों को हर संभव सहायता दी जा रही है। दूध के स्टोर करने के लिए कूलर, दूध की जांच के लिए मशीनें भी उपलब्ध करवाई गई हैं। ग्रामीण महिलाओं की यह पहल न केवल उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि जिले में डेयरी क्षेत्र के विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान कर रही है। - डॉ. राहुल देव, मुख्य जिला पशु पालन विभाग, सांबा
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