नशा मुक्त अभियान का असर, ओपीडी में बढ़ रहे मरीज
अस्पताल प्रशासन के अनुसार अब तक ओपीडी में पंजीकृत हो चुके 600 से अधिक मरीज
अभिभावक स्वयं बच्चों को लेकर पहुंच रहे अस्पताल, काउंसलिंग के साथ-साथ किया जा रहा चिकित्सकीय उपचार
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। जम्मू-कश्मीर में चलाए जा रहे नशा मुक्त अभियान का सकारात्मक प्रभाव अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। नशे की लत के शिकार युवा अब उपचार और परामर्श के लिए आगे आ रहे हैं। इससे अस्पताल की ओपीडी में उपचार और परामर्श के लिए आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार अब तक 600 से अधिक मरीज ओपीडी में पंजीकृत हो चुके हैं।
अधिकारियों का कहना है कि पहले लोग सामाजिक झिझक और बदनामी के डर से नशा मुक्ति ओपीडी में आने से कतराते थे लेकिन अब स्थिति बदल रही है। अभिभावक स्वयं बच्चों को लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं जहां उनकी काउंसलिंग के साथ-साथ चिकित्सकीय उपचार भी किया जा रहा है। इस बीच उपायुक्त सांबा और एसएसपी सांबा ने अधिकारियों के साथ बैठक कर नशे के शिकार युवाओं को बेहतर उपचार और पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि उपचार के बाद युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा जाए।
उपायुक्त ने नशे से प्रभावित कई परिवारों से भी मुलाकात की और उन्हें आश्वस्त किया कि युवाओं के स्वास्थ्य होने के बाद उनके पुनर्वास और रोजगार के लिए प्रशासन हरसंभव सहायता प्रदान करेगा। लोगों का कहना है कि नशा मुक्त अभियान के कारण समाज में जागरूकता बढ़ी है। लोगों का मानना है कि प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और समाज के संयुक्त प्रयासों से नशे के खिलाफ लड़ाई को और मजबूती मिलेगी।
कोट
जिला अस्पताल में नशा मुक्ति ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। मरीज की डॉक्टर अच्छी तरह काउंसलिंग करने के बाद उपचार शुरू करते हैं। दवा भी एम्स दिल्ली से आ रही है। नशा मुक्ति अभियान का असर भी दिखने लगा है।
- डॉ. मोहिंदर कुमार, अधीक्षक, जिला अस्पताल सांबा