सांबा, विजयपुर। एम्स के कार्डियोलॉजी विभाग ने अत्याधुनिक इंट्रावस्कुलर लिथोट्रिप्सी (आईवीएल) तकनीक का उपयोग कर एक हृदय रोग से पीड़ित मरीज की सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इस प्रक्रिया के तहत गैर-एसटी एलिवेशन मायोकार्डियल इंफार्क्शन से पीड़ित मरीज की सर्जरी की गई।
डॉक्टरों के अनुसार मरीज की हृदय धमनी में कैल्शियम जमाव के कारण पारंपरिक स्टेंटिंग अत्यधिक जोखिम भरी थी। ऐसे में कार्डियोलॉजी विभाग की टीम ने अत्याधुनिक आईवीएल तकनीक का सहारा लिया। यह तकनीक सोनिक दबाव तरंगों के जरिए धमनी की दीवारों में जमा कैल्शियम को सुरक्षित रूप से तोड़कर स्टेंट लगाने की प्रक्रिया को आसान बनाती है और रक्त प्रवाह को बहाल करती है।
यह जटिल प्रक्रिया डॉ. जुबैर फारूक और डॉ. मायंक सैनी के नेतृत्व में सफलतापूर्वक पूरी की गई। एम्स के कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) डीएन शर्मा ने इस उपलब्धि पर टीम को बधाई दी। कहा कि यह संस्थान की उन्नत और विश्वस्तरीय कार्डियक सेवाएं प्रदान करने की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि कार्डियक कैथ लैब के कमीशन होने के मात्र तीन महीनों में विभाग लगभग 150 कार्डियक एवं परिधीय प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक कर चुका है। संवाद