देश भर में सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ रोकने के लिए प्राकृतिक बाधाओं यानी सांप, मगरमच्छ और रेंगने वाले जीवों की मदद लेने पर विचार किया जा रहा है। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने देश के सभी सीमावर्ती इलाकों व नदी से सटी सीमाओं पर घुसपैठ रोकने के लिए नए उपायों पर विचार शुरू किया है। इस बारे में फील्ड यूनिट्स से सुझाव मांगे गए हैं कि क्या सांपों और मगरमच्छों जैसे रेंगने वाले जीवों का इस्तेमाल प्राकृतिक अवरोधक के रूप में किया जा सकता है।
यह पहल गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों के अनुरूप वैकल्पिक और नवाचारी उपायों की तलाश का हिस्सा है। सूत्रों के मुताबिक नई तकनीक से लैस हो रहे घुसपैठियों को रोकने के लिए नए तरीकों पर मंथन जरूरी है। बीएसएफ के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक अभी यह केवल विचार-विमर्श और इसकी संभावनाओं पर विचार का एक चरण है। किसी भी कदम से पहले पर्यावरणीय प्रभाव, मानव सुरक्षा और कानूनी पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। सीमा से लगे कई गांवों की मौजूदगी को देखते हुए स्थानीय आबादी की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बताई गई है।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, प्राकृतिक जीवों का उपयोग सुरक्षा उपाय के तौर पर जटिल हो सकता है। वन्यजीव संरक्षण कानून, पारिस्थितिक संतुलन और अनियंत्रित जोखिम जैसे मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना होगा। दूसरी ओर तकनीकी निगरानी जैसे फ्लडलाइटिंग, नाइट विजन, ड्रोन और रिवर पेट्रोलिंग-पहले से लागू हैं, लेकिन भौगोलिक चुनौतियों के कारण अतिरिक्त उपायों की जरूरत महसूस होती है। फील्ड यूनिट्स से प्राप्त सुझावों के आधार पर एक समेकित रिपोर्ट तैयार की जाएगी जिसके बाद उच्च स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल इस प्रस्ताव को लेकर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
कठुआ से लेकर राजोरी तक सीमा घुसपैठ के लिए संवेदनशील
जम्मू संभाग में कठुआ, सांबा और जम्मू में अंतरराष्ट्रीय सीमा से घुसपैठ की आशंका बनी रहती है। सांबा जिले में रामगढ़ सेक्टर, घगवाल और चिला डंगा जैसे क्षेत्र से घुसपैठ होती रही है। आतंकी पुराने रास्तों के साथ-साथ सीमा पार से सुरंगों का उपयोग भी करते हैं। कठुआ, जम्मू के अलावा एलओसी से पुंछ और राजोरी से भी आतंकी के घुसपैठ के रूट रहे हैं। बता दें कि पिछले साल जम्मू में आई बाढ़ से कठुआ, सांबा और जम्मू जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़ा व चौकियां क्षतिग्रस्त हुई थी। करीब छह किलोमीटर लंबी बाड़ और लगभग 18 सीमा चौकियों प्रभावित हुई थी। हालांकि बीएसएफ ने इनका मरम्मत का कार्य अब पूरा कर लिया है।