400 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई विस्तार की कवायद, किसानों ने गिनाईं जमीनी हकीकत की चुनौतियां
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए जिला प्रशासन भले ही आधुनिक सिंचाई प्रबंधन और जल संरक्षण योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रहा हो लेकिन खेतों की हकीकत किसानों की चिंता बढ़ा रही है। मॉडर्नाइजेशन ऑफ कमांड एरिया डेवलपमेंट एंड वाटर मैनेजमेंट (एम-सीएडीडब्ल्यूएम) परियोजना के तहत जिले के सात गांवों में 400 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधाओं से जोड़ने का काम जारी है। किसानों का कहना है कि योजनाओं की चमक के पीछे जमीनी चुनौतियां अब भी जस की तस बनी हुई हैं।
जिले के विभिन्न गांवों के किसानों के अनुसार खेती आज भी पानी की कमी, बढ़ती उत्पादन लागत और मौसम की बेरुखी से जूझ रही है। उनका कहना है कि कई इलाकों में नहरों और सिंचाई ढांचे की स्थिति कमजोर है। इस कारण खेतों तक समय पर पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता। ऐसे में फसल उत्पादन बढ़ाने के सरकारी लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं होगा।
बेहतर पैदावार की कुंजी मजबूत सिंचाई व्यवस्था है। उनका कहना है कि यदि खेतों को नियमित और पर्याप्त पानी उपलब्ध हो जाए तो उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव है। इससे किसानों की आय भी बढ़ सकती है।
- किसान किशोर कुमार
खेती की बढ़ती लागत को सबसे बड़ी चुनौती बताया। बीज, खाद, कीटनाशकों और कृषि उपकरणों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं जबकि फसलों को उचित मूल्य नहीं मिल रहा। इसके अलावा सिंचाई के लिए बिजली की अनियमित आपूर्ति और डीजल के बढ़ते दाम किसानों की कमर तोड़ रहे हैं।
- किसान मदन लाल
आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए किसानों को आर्थिक सहायता और प्रोत्साहन की सख्त जरूरत है। उन्होंने मौसम में लगातार हो रहे बदलावों पर चिंता जताते हुए कहा कि कभी सूखे जैसी स्थिति तो कभी अचानक होने वाली भारी बारिश फसलों को नुकसान पहुंचा रही है, जिससे खेती का जोखिम पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है।
- किसान बलदेव सिंह
किसानों का आरोप है कि समय-समय पर अभियान और योजनाएं तो शुरू की जाती हैं लेकिन अधिकांश गतिविधियां केवल खानापूर्ति तक सीमित रह जाती हैं। किसानों का कहना है कि उनकी वास्तविक समस्याओं जैसे सिंचाई संकट, फसलों के उचित दाम, बढ़ती लागत, बिजली आपूर्ति और मौसम से होने वाले नुकसान के समाधान के लिए जमीनी स्तर पर प्रभावी प्रयास नजर नहीं आते। उनका मानना है कि जब तक किसानों की समस्याओं को समझकर स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा।
कोट
एम-सीएडीडब्ल्यूएम परियोजना के तहत सात गांवों में सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के प्रयास जारी हैं। किसानों से प्राप्त सुझावों और शिकायतों को संबंधित विभागों तक पहुंचाया जा रहा है।
- डॉ. संजय खजूरिया, प्रमुख कृषि विज्ञान केंद्र सांबा