अतिरिक्त मुंसिफ (ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास) सांबा की अदालत ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। अतिरिक्त मुंसिफ (ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास) सांबा की अदालत ने धोखाधड़ी मामले में आरोपी महिला का जब्त पासपोर्ट अस्थायी रूप से लौटाने के आदेश दिए हैं। अदालत ने माना कि पासपोर्ट न तो एफआईआर का हिस्सा है और न ही इसके किसी अवैध उपयोग के प्रमाण रिकॉर्ड पर मौजूद है।
मामले के अनुसार जम्मू के तालाब तिल्लो की महिला आरोपी ने अदालत में आवेदन दायर कर पासपोर्ट जारी करने की मांग की थी। उनका कहना था कि पासपोर्ट एक महत्वपूर्ण पहचान और यात्रा दस्तावेज है जिसे जांच एजेंसी ने जब्त कर रखा है।
पुलिस के अनुसार सांबा थाने में दर्ज एफआईआर में जांच के दौरान आरोप सामने आए थे कि अपराध के बाद आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए शारजाह (यूएई) चली गई थी। बाद में भारत लौटने पर 23 मार्च 2026 को दिल्ली हवाई अड्डे पर उसे हिरासत में लिया गया और तलाशी के दौरान उसका पासपोर्ट बरामद किया गया।
सरकारी पक्ष ने पासपोर्ट लौटाने का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी गंभीर आपराधिक मामले का सामना कर रही है और पासपोर्ट वापस मिलने पर उसके देश छोड़कर भागने की आशंका है। अदालत ने पाया कि पासपोर्ट आरोपी की व्यक्तिगत तलाशी के दौरान बरामद हुआ था और इसका अपराध से सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ है। अदालत ने थाना प्रभारी सांबा को निर्देश दिया कि निर्धारित सुपुर्दनामा और लिखित आश्वासन लेने के बाद पासपोर्ट आवेदिका को अस्थायी रूप से सौंप दिया जाए। साथ ही शर्त रखी गई कि आवश्यकता पड़ने पर पासपोर्ट अदालत या पुलिस के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।