सांबा। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने थाना रामगढ़ क्षेत्र में आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में तीन आरोपियों को जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इस स्तर पर आरोपियों की भूमिका इतनी स्पष्ट नहीं है कि उन्हें जमानत से वंचित रखा जाए।
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अपराध सिद्ध करने के लिए आरोपी की तरफ से आत्महत्या के लिए स्पष्ट उकसावा या सहायता देने का इरादा साबित होना जरूरी है जो फिलहाल जांच में सामने नहीं आया है।
मामले में आरोप है कि मृतक को गांव की पंचायत में सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया था। इससे वह मानसिक रूप से परेशान हुआ। हालांकि अदालत ने पाया कि पंचायत और आत्महत्या के बीच समय का पर्याप्त अंतर है। इससे सीधे उकसावे का संबंध स्थापित नहीं होता।
जांच में यह भी सामने आया कि अन्य आरोपियों की भूमिका केवल एक वीडियो साझा करने तक सीमित है। इसे आत्महत्या से सीधे जोड़ने के पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं।
अदालत ने सह आरोपियों की अंतरिम जमानत को स्थायी करते हुए एक अन्य आरोपी को 50 हजार रुपये के मुचलके पर रिहा करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी आरोपियों को साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने और प्रत्येक सुनवाई में उपस्थित रहने को कहा गया।