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Jammu News: पापड़ ब्राह्मणा में मनरेगा की हाजिरी में 10 नाम और फोटो में छह ही मजदूर

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सांबा। खामियों को लगातार उजागर किए जाने के बावजूद महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में अनियमितताओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। नड क्षेत्र की पापड़ ब्राह्मणा पंचायत में मनरेगा पोर्टल पर अपलोड श्मशान घाट के एक कार्य के रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ी सामने आई है।
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इसमें मनरेगा के कार्य की हाजिरी में 10 लोगों के नाम हैं, लेकिन फोटो में छह ही मजदूर दिखाई दे रहे हैं। इससे योजना निगरानी प्रणाली की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
इससे पहले राजपुरा ब्लॉक की चचवाल, घगवाल ब्लॉक की टपयाल, सुंब ब्लॉक की पटयारी, सोडम व गोरन और नड्ड ब्लॉक की पापड़ अवतारा तथा विजयपुर ब्लॉक की राजिंदर सिंह पुरा पंचायत में मनरेगा कार्यों के रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत में अंतर सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई जगह पोर्टल पर मजदूरों की संख्या अधिक दर्ज की गई, जबकि मौके पर कम लोग काम करते दिखाई दिए।
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ताजा मामले में नड्ड ब्लॉक की पापड़ ब्राह्मणा पंचायत में मनरेगा साइट पर अपलोड विवरण में समतलीकरण एवं प्रोटेक्शन वॉल, श्मशान घाट पापड़ ब्राह्मणा” कार्य दर्ज किया गया है। पोर्टल पर अपलोड हाजिरी में 10 श्रमिकों के नाम दर्ज हैं, जबकि मौके पर ली गई समूह फोटो में सिर्फ 6 लोग ही दिखाई दे रहे हैं। यानी रिकॉर्ड और वास्तविक उपस्थिति में लगभग 40 प्रतिशत का अंतर साफ नजर आ रहा है।
एनएमएमएस रिकॉर्ड के अनुसार पहली फोटो 18 फरवरी 2026 को दोपहर 12:47 बजे ली गई और दोपहर 2:40 बजे अपलोड की गई। हैरानी की बात यह है कि नियमों के अनुसार कार्यस्थल की सुबह और शाम दोनों समय की जियो टैग फोटो अनिवार्य होती है, लेकिन इस कार्य में दूसरी फोटो अपलोड ही नहीं की गई, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारों का मानना है कि मनरेगा में मजदूरी भुगतान पूरी तरह डिजिटल उपस्थिति और फोटो साक्ष्य पर आधारित है। ऐसे में यदि फोटो और हाजिरी में अंतर है तो यह सीधे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका को जन्म देता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पहले भी क्षेत्र में कई कार्यों में इसी तरह की अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन जांच और कार्रवाई कागजों तक सीमित रह जाती है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने मनरेगा में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए एनएमएमएस मोबाइल मॉनिटरिंग प्रणाली लागू की है, जिसके तहत जियो टैग फोटो, वास्तविक उपस्थिति और समयबद्ध अपलोडिंग अनिवार्य की गई है। इसके बावजूद बार-बार सामने आ रही गड़बड़ियां यह संकेत देती हैं कि निगरानी तंत्र जमीनी स्तर पर प्रभावी नहीं हो पा रहा।
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