विजयपुर। ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग ने एक मरीज की जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की। मरीज के बाईं एड्रेनल ग्रंथि में बड़ा ट्यूमर था। यह सर्जरी संस्थान की उन्नत कैंसर देखभाल की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
मरीज़ को शुरू में एम्स जम्मू के बाहर कुछ सामान्य शिकायतों और इमेजिंग रिपोर्ट के आधार पर बाईं एड्रेनल ग्रंथि में ट्यूमर होने का पता चला था। संस्थान में पहुंचने से पहले मरीज़ ने कई अन्य केंद्रों पर भी इलाज करवाया था। एम्स जम्मू में उन्नत इमेजिंग और बायोकेमिकल परीक्षणों सहित व्यापक जांच ने एक ''''''''फंक्शनल एड्रेनल ट्यूमर'''''''' (सक्रिय ट्यूमर) की उपस्थिति की पुष्टि की। ऐसे ट्यूमर सर्जरी के दौरान गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं, विशेष रूप से रक्तचाप में अचानक वृद्धि, जिससे मरीज़ की जान को खतरा हो सकता है। इसके लिए एक बहु-विषयक ट्यूमर बोर्ड की बैठक बुलाई गई। एक चरण-दर-चरण उपचार योजना सावधानीपूर्वक तैयार की गई।
मामले की जटिलता को देखते हुए एंडोक्रिनोलॉजी विभाग ने सहायक प्रोफेसर डॉ. जूही जमवाल के मार्गदर्शन में अल्फा और बीटा ब्लॉकेड थेरेपी के साथ सर्जरी से पहले की तैयारी (ऑप्टिमाइज़ेशन) शुरू की। इस क्रमिक दृष्टिकोण ने सर्जरी से पहले मरीज की नब्ज़ और रक्तचाप को स्थिर करना सुनिश्चित किया।
मरीज को पहले से ही ''''''''क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़'''''''' की समस्या भी थी। पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. गणेश कुमार की विशेषज्ञता से मरीज़ की श्वसन स्थिति को भी सर्जरी के लिए अनुकूल बनाया गया, जिससे सुरक्षित एनेस्थीसिया और सफल सर्जिकल परिणाम सुनिश्चित हुए।