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Jammu News: अरनिया में पिछले एक सप्ताह में 2380 आभा आईडी जेनरेट की गई

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अरनिया। केंद्र सरकार की तरफ से आभा आईडी (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) जनरेट करने की मुहिम को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए जोर दिया जा रहा है। इसके चलते अरनिया स्वास्थ्य विभाग की तरफ से पिछले एक सप्ताह में 2380 आभा आईडी जेनरेट की गई है। अरनिया स्वास्थ्य विभाग युद्ध स्तर पर आभा आईडी जनरेट करने में जुटा हुआ है। इसमें स्वास्थ्य कर्मी और आशा वर्कर्स मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। आभा आईडी प्रत्येक वर्ग के लोगों की बनाई जा रही है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कस्बे और गांव में शिविर भी आयोजित किया जा रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में आंगनबाड़ी वर्कर्स की सहायता से आभा आईडी बड़ी संख्या में जेनरेट की जा रही हैं। अरनिया अस्पताल में मरीज के पहुंचने पर पर्ची काटने के साथ ही आभा आईडी जेनरेट की जा रही है। इसके अलावा अरनिया जोन के प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र में आभा आईडी जेनरेट करने को प्रमुखता दी जा रही है। वहीं दूसरी ओर लोग भी अब आईडी बनाने के लिए स्वास्थ्य शिविरों में बढ़ चढ़कर भाग ले रहे हैं।
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आभा आईडी जेनरेट करने के लिए मोबाइल नंबर, आधार कार्ड और इंटरनेट कनेक्शन का होना अनिवार्य है। जिस पर ओटीपी भेजा जाता है। ओटीपी दर्ज करने के बाद स्वास्थ्य कर्मी आभा आईडी को जनरेट करता है।

मरीज का मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है
आभा आईडी भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक डिजिटल हेल्थ आईडी है। इसके माध्यम से मरीज का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाता है। आभा आईडी जेनरेट होने के बाद मरीज को चेकअप करवाने के लिए पर्ची कटवाने की जरूरत नहीं रहती है। जिन अस्पतालों में स्कैन एंड शेयर की सुविधा दी जा रही है। वहां पर मरीज सीधा स्कैन करने के बाद डॉक्टर को चेकअप करवा सकता है। स्कैन करने के बाद डॉक्टर के फोन पर मरीज की नियुक्ति दर्ज हो जाती है। डॉक्टर द्वारा मरीज को लिखी दवाई भी ऑनलाइन माध्यम से डिस्पेंसरी से दी जाती है। आभा आईडी जनरेट होने के बाद भारत के किसी भी राज्य में डॉक्टर से चेकअप करवाने पर आपका पुराना रिकॉर्ड आभा आईडी से मिल जाता है। इसके चलते डॉक्टर को इलाज में आसानी हो जाती है।
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कोट
आभा आईडी बनाने का कार्य प्रमुखता से किया जा रहा है। रोजाना का लक्ष्य निर्धारित कर आभा आईडी जेनरेट की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि आभा आईडी जेनरेट होने के बाद मरीज का पुराना रिकॉर्ड सुरक्षित हो जाता है।
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-डॉ. रोहित कुमार, जोनल मेडिकल अफसर अरनिया
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