अरनिया। क्षेत्र के गांव करियाल से चक कीमा के बीच बहते नाले पर पुल के निर्माण कार्य की प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई है। नाबार्ड की टीम ने 10 दिन पहले अंतिम मंजूरी से पहले पुल के निर्माण कार्य वाली साइट का निरीक्षण किया है। इस मौके पर उन्होंने पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा भेजी गई डीपीआर के अनुरूप निरीक्षण किया है। नए वित्तीय वर्ष में फंड जारी होने के साथ ही टेंडर प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इसके बाद पुल का निर्माण कार्य शुरू होगा।
सीमावर्ती गांव के लोगों की वर्षों से इस पुल के निर्माण कार्य की मांग रही है। लंबे संघर्ष के बाद लोगों को पुल के निर्माण कार्य की उम्मीद बंधी है। पुल के निर्माण कार्य की अंतिम मंजूरी से पहले ही लोग खुश नजर आ रहे हैं। सीमावर्ती गांव के लोगों की कुल 25000 आबादी को पुल का फायदा मिलेगा। पुल बन जाने से लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, खेतीबाड़ी, रोजगार और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए समय और आर्थिक बचत होगी। पुल का निर्माण कार्य होने से लोगों को आरएस पुरा बिश्नाह उप जिला के साथ ही मुख्य जिला जम्मू पहुंचना आसान हो जाएगा। यातायात के लिहाज से लोगों को सुविधा मुहैया होगी। बॉर्डर से सीधा आरएस पुरा, बिश्नाह और फिर जम्मू के लिए बस सेवा की सहूलियत मिलेगी। स्वास्थ्य सुविधाओं से जूझते सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को उप जिला अस्पताल में पहुंचने में समय की बचत होगी। पुल की सुविधा मिलने से लोगों को शहर जाकर रोजगार में आसानी होगी। सीमा पर बसे लगभग 30 गांव के लोगों को पुल का सीधा फायदा पहुंचेगा।
इस मुद्दे पर पंचायत आल्हा के पूर्व उप सरपंच लवली सिंह ने कहा कि पुल का निर्माण कार्य होने से सीमावर्ती क्षेत्र के लोग मुख्यधारा से जुड़ जाएंगे। लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, यातायात, रोजगार की सहूलियत मिलेगी।
इस मुद्दे पर डीडीसी अरनिया सुरेखा देवी ने कहा कि पुल के निर्माण कार्य के लिए लोगों ने लंबा संघर्ष किया है। उन्होंने कहा कि पुल का निर्माण कार्य होने से सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों के जीवन यापन में बदलाव आएगा।
गांव मड़ोल के स्थानीय निवासी रिशपाल सिंह ने कहा कि गोलीबारी से जूझने वाला सीमावर्ती क्षेत्र पुल के निर्माण कार्य के बाद फिर से शहर के साथ जुड़ जाएगा। पुल की सुविधा मिल जाने से पलायन पर अंकुश लगेगा।
इस मुद्दे पर पंचायत पिंडी चाड़का कलां के पूर्व उप सरपंच कुलदीप राज ने कहा कि पुल का निर्माण कार्य हो जाने के बाद हर तबके को फायदा मिलेगा। यातायात आसान हो जाएगा। सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों के समय की बचत और आर्थिक संकट दूर होगा।
कोट
पुल के निर्माण कार्य के लिए दो बार डीपीआर भेजी गई थी। 10 दिन पहले नाबार्ड की टीम ने साइट का निरीक्षण किया है। इसके चलते पुल के निर्माण कार्य को अंतिम मंजूरी मिलना लगभग तय है। फंड जारी होने के साथ ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। 10 करोड़ रुपए की लागत से पुल का निर्माण कार्य होगा।
-रफीक चौधरी, एईई, पीडब्ल्यूडी विभाग बिश्नाह