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Jammu News: पति की मौत के बाद ई-रिक्शा चालक बनी सोनिया, रोजाना कमा रही 700 रुपये

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अरनिया। देश में महिलाएं दिन प्रतिदिन नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। ऐसी ही एक संघर्ष भरी कहानी महिला ई-रिक्शा चालक 28 वर्षीय सोनिया सैनी की है। सोनिया सैनी ने प्राइवेट स्कूल में दर्जा चार कर्मचारी से ई-रिक्शा ड्राइवर तक का सफर तय किया है।
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सोनिया सैनी अरनिया ब्लॉक के सीमावर्ती गांव मड़ोल की रहने वाली हैं। सोनिया ने मैट्रिक तक अपनी पढ़ाई पूरी की है। 5 साल पहले हृदय गति रुकने से पति का देहांत हो गया। इससे सोनिया पर दुखों का पहाड़ टूट गया। पति के जाने के बाद घर में कमाई का कोई साधन नहीं रहा। प्राइवेट स्कूल में मिलने वाले मानदेय से घर का खर्च नहीं चल पा रहा था। दो बच्चों की परवरिश और आत्मनिर्भर बनने के सपने ने सोनिया सैनी को ई-रिक्शा चालक बना दिया।
सोनिया सैनी ने बताया कि पति के जाने के बाद लोगों की तरफ से आजीविका कमाने के लिए उसे घरों में काम करने के लिए कहा गया, परंतु उसका मन नहीं माना। स्कूल से मिलने वाले वेतन से घर का खर्च पूरा नहीं होता था। दोनों बच्चों की परवरिश की चिंता दिन-रात सताने लगी। पति ने तोहफे मे स्कूटी भेंट की थी। इससे उन्होंने ड्राइविंग सीख ली थी। मन में ई-रिक्शा से आजीविका कमाने का खयाल आया। अपने एक पहचान वाले ई-रिक्शा चालक से जानकारी हासिल की। हालांकि महिला होने के चलते उसे ड्राइविंग के पेशे से दूर रहने के लिए कहा गया, लेकिन आत्मनिर्भर बनने के जुनून ने उसे ई-रिक्शा चलाने के लिए प्रेरित किया। बैंक में लोन के लिए आवेदन किया। एडवांस में 10 हजार रुपए जमा करवाए। 2.40 लाख में ई-रिक्शा खरीदा। बैंक की तरफ से महीने की 5400 रुपये किस्त तय की गई।
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उन्होंने कहा की शुरुआत में ई-रिक्शा चलाने से कई बार मायूसी हाथ लगी। परंतु समय बीतने के साथ काम का अभ्यास हो गया। रोजाना स्तर पर 600 से 700 रुपए आमदनी होने लगी। घर की आर्थिक स्थिति पटरी पर लौट आई। उन्होंने बताया कि पिछले 4 महीने से ई-रिक्शा चला रही हैं।

उन्होंने बताया कि ई-रिक्शा चलाने के साथ वह घर के सारे रोजमर्रा के कार्य समय पर निपटा लेती हैं। सुबह बच्चों को ई-रिक्शा से ही स्कूल छोड़ती हैं। बच्चों को स्कूल से छुट्टी के उपरांत ई-रिक्शा से ही घर ले आती हैं। उसके बाद दोपहर को ट्यूशन पर छोड़ खुद ई-रिक्शा लेकर निकल पड़ती है। उन्होंने बताया कि अब लोग फोन पर ही उसके ई-रिक्शा की बुकिंग कर लेते हैं। उन्होंने बताया कि समाज में प्रोत्साहित करने वाले लोगों की कमी नहीं है। ऐसे ही लोगों की प्रेरणा से आज वह आत्मनिर्भर बन गई हैं।
सोनिया सैनी ने बताया कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ई-रिक्शा से जोड़ना उनका प्रथम लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि ई-रिक्शा का काम बेहतर है। बॉर्डर क्षेत्र में पहली ई-रिक्शा चालक होने पर उन्हें गर्व है।
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