संवाद न्यूज एजेंसी
रामगढ़। 25 जून को लगने वाले चमलियाल मेले की तैयारियां पूरी हो गई हैं। इस बार ग्रामीणों ने सरकार से पाकिस्तान के श्रद्धालुओं को न्योता देने की मांग की है।
बता दें कि भारत-पाक बंटवारे से पहले से ही बाबा चमलियाल की मजार पर वार्षिक मेला आयोजित होता रहा है। बंटवारे के बाद वर्ष 1965, 1971 व 1999 और कारगिल युद्ध हुआ। सीमा पर सीज फायर का कई बार उल्लंघन और दोनों देशों में तनाव उत्पन्न हुआ। इसके बावजूद बाबा चमलियाल के प्रति दोनों देशों के लोगों की आस्था की मिठास कम नहीं हुई।
वर्ष 2002 में दोनों देशों में तनाव के चलते मेले का आयोजन मजार स्थल से दो किमी पीछे गांव दग-छन्नी में किया गया था। इसमें पाक रेंजर्स अधिकारियों ने शिरकत करना उचित नहीं समझा। सात वर्ष पूर्व 2018 में भी मेला पारंपरिक रीति से संपन्न नहीं हो पाया था।
मेले से छह दिन पूर्व पाकिस्तान की ओर से गई फायरिंग में बीएसएफ के चार जवान शहीद हो गए थे। इसके भारत सरकार व केंद्रीय गृह मंत्रालय व बीएसएफ ने पाक रेंजर्स को न तो मेले का न्योता दिया और न ही पाकिस्तान से बाबा की मजार पर चढ़ाने के लिए चादर आई। भारत सरकार ने भी बाबा जी की मजार का प्रसाद शरबत-शक्कर पाकिस्तान नहीं भेजा। कोरोना महामारी के कारण वर्ष 2020 व 2021 में जिला प्रशासन ने मेला स्थगित कर दिया था।
मजार कमेटी ने मेले वाले दिन पारंपरा को निभाया और बाबा जी की मजार पर चादर चढ़ाने की रस्म अदा की गई। सूत्रों के अनुसार इस बार भी पाक रेंजर मेले में शिरकत नहीं करंगे और न ही पाकिस्तान से बाबा जी की मजार पर चढ़ाने के लिए चादर आएगी और न ही पाक श्रद्धालुओं को पवित्र मजार का शरबत-शक्कर नसीब होगा।
इस बार भारत सरकार और गृह मंत्रालय ने पाक को मेले का कोई आमंत्रण नहीं दिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस बार पाकिस्तान को भी न्योता दिया जाए। पाक में बैठे बाबा के भक्तों को भी शकर-शरवत मिल सके और मेले की शोभा बनी रहे।
इस बार मेला धूमधाम से मनाया जा रहा है। मेले की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।