श्री शिव महापुराण की कथा सुनते श्रद्धालु।
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अखनूर। श्री शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन कथावाचक सुभाष शास्त्री ने श्रद्धालुओं को ''''''''ध्यान'''''''' के महत्व के बारे में बताया। कहा कि मन की एकाग्रता और आत्मा की परम उन्नति का मार्ग केवल ध्यान से ही संभव है।
उन्होंने कहा कि ध्यान का अर्थ केवल आखें बंद करना नहीं, बल्कि चंचल मन को नियंत्रित कर परमात्मा में लीन करना है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे नदी का जल अंत में समुद्र में समाहित हो जाता है, वैसे ही ध्यान के माध्यम से मनुष्य की चेतना परमात्मा में विलीन हो जाती है।
शास्त्री जी ने बताया कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में ध्यान न केवल आध्यात्मिक बल्कि मानसिक और शारीरिक शांति के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा, ध्यान आत्मा की सीढ़ी है, जो सांसारिक उलझनों से ऊपर उठाकर ईश्वर के साक्षात्कार की ओर ले जाती है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने शास्त्री जी के प्रवचनों को ध्यानपूर्वक सुना और जीवन में ध्यान को अपनाने का संकल्प लिया। भजन-कीर्तन और आरती से वातावरण भक्तिमय हो उठा। शिव महापुराण कथा 5 अगस्त तक जारी रहेगी।