आशा देवी की तरफ से तैयार किए गया साबून।
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अरनिया। अरनिया ब्लॉक के सीमावर्ती गांव पोआल की आशा देवी ने साबुन के व्यवसाय से सफलता का नया द्वार खोला है। आशा देवी ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर साबुन बनाने की रेसिपी सीखी और आज उनके साबुन की बिक्री जम्मू कश्मीर समेत दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और अन्य बड़े शहरों में हो रही है।
इंटरमीडिट तक की शिक्षा ग्रहण करने वाली आशा देवी के सपने बड़े हैं। इसीलिए कुछ अलग करने की उनके मन में अकुलाहट भी है। यही कारण है कि एक गृहिणी के रूप में जीवन का सफर शुरू करने के बाद भी वे उद्यमिता की राह पर चल पड़ी हैं। उन्होंने वर्ष 2022 में यूट्यूब पर साबुन बनाने की रेसिपी सीखना शुरू किया और दिल्ली से ऑनलाइन साबुन बनाने का मूल पदार्थ मंगवाया। उन्होंने घर में साबुन की पांच टिकिया बनाईं और समूह की महिलाओं को इस्तेमाल करने के लिए दीं। महिलाओं ने साबुन की गुणवत्ता की सराहना की और आशा देवी का हौसला बढ़ाया।
आज आशा देवी के साबुन की बिक्री प्रति माह 300 टिकिया तक पहुंच गई है। उनके साबुन में देसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है, जैसे कि एलोवेरा, शहद, मुल्तानी मिट्टी, नीम, गुलाब, लेमन और लैवेंडर। साबुन की कीमत 50 रुपये से लेकर 100 रुपये तक है।
आशा देवी का लक्ष्य सीमावर्ती क्षेत्र में साबुन की फैक्ट्री खोलना है, जिससे क्षेत्र की महिलाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें। वह स्वयं सहायता समूह के 234 समूह के 3500 सदस्यों का कामकाज भी देख रही हैं और उन्हें मासिक तौर पर मानदेय दिया जाता है।
आशा देवी की कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो अपने सपनों को पूरा करना चाहती हैं। उन्होंने साबित किया है कि सीमावर्ती क्षेत्र में सुविधाओं के अभाव के बावजूद भी सफलता प्राप्त की जा सकती है।