लैवेंडर की खेती प्रदेश के छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाएगी। सीएसआईआर-आईआईआईएम जम्मू अगले तीन वर्षों में प्रदेश में नौ हजार हेक्टेयर भूमि पर लैवेंडर की खेती को बढ़ावा देगा। इसके लिए आईआईआईएम ने अरोमा मिशन फेज-2 की शुरुआत की है।
इसके तहत अगले तीन वर्षों में पारंपरिक खेती करने वाले किसानों को लैवेंडर सहित अन्य खुशबूदार फूलों की खेती के प्रति जागरूक किया जाएगा, जिससे उनकी आमदनी बढ़ेगी। मंगलवार को आईआईएम की ओर से आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में किसानों के साथ लैवेंडर की खेती करने वाले प्रगतिशील किसान पहुंचे। इस दौरान किसानों ने सीएसआईआर-आईआईआईएम के वैज्ञानिकों से अनुभव साझा किए और लैवेंडर की खेती से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा की।
इस दौरान आईआईआईएम के वरिष्ठ वैज्ञानिक सुमित गैरोला ने कहा कि प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद इस अरोमा मिशन के पहले फेज को शुरू किया था। शुरूआत में हमने किसानों को लैवेंडर की खेती के लिए आठ लाख मुफ्त पौधे दिए। इसके साथ उन्हें पौधे लगाने से लेकर उन्हें मार्केट में बेचने तक की जानकरी मुहैया करवाई। अरोमा मिशन के पहले फेज में दो हजार हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया था। उन्होंने कहा कि 14 ऐसे पौधे हैं जिनकी खेती तीन सौ मीटर से साढ़े चार हजार मीटर तक किसी भी ऊंचाई या पर्यावरण वाले क्षेत्र में हो सकती है। जम्मू-कश्मीर में लैवेंडर काफी लोकप्रिय बन गया है, जिसकी खेती से काफी किसानों के आमदनी बढ़ी है।
रियासी में बंदरों के आतंक से बचाएगी लेमन ग्रास
रियासी में बंदरों का काफी आतंक रहता है। वह फसल को तबाह कर देते हैं। ऐसे में सीएसआईआर-आईआईआईएम रियासी में लैमन ग्रास के प्रति किसानों को प्रोत्साहित करेगा। इसके साथ प्रदेश में हीमरोस, वाइल्ड मेरीगोल्ड, मिंट, जम्मू मोनरडा, रोजमैरी जैसे खुशबूदार फूलों की खेती हो रही है। आईआईआईएम अपने छह फार्म में पौधों को तैयार करता है, इसमें दो सेंटर जम्मू और श्रीगनर में है, जबकि एक लद्दाख में सेंटर बनाने जा रहे हैं। इनमें पौधों को तैयार करने के साथ अन्य शोध किए जाएंगे।