आरएसएस के सर कार्यवाह दतात्रेय होसबाले ने कहा हैं कि कश्मीरी हिंदुओं ने पिछले कई दशकों से त्याग, बलिदान और संकट सहते हुए जिस तरह धर्म की रक्षा की वह इतिहास में एक उदाहरण है। नवरेह पर संजीवनी शारदा केंद्र की तरफ से आयोजित शौर्य दिवस कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम जुडे़ होसबाले ने अनुच्छेद 370 व 35ए के खत्म होने को मील का पत्थर बताया।
जम्मू-कश्मीर समेत विश्व भर के कश्मीरी हिंदुओं को संबोधित करते हुए होसबाले ने नवरेह की बधाई देते हुए कहा कि विदेशी हमलावरों से हमारे पूर्वज सदियों तक संघर्ष करते रहे लेकिन कभी हार नहीं मानी। उन्होंने कहा कश्मीरी हिंदू श्रेया भट ने त्याग और समर्पण का उदाहरण प्रस्तुत किया। वैसे ही ललिता दित्य ने शौर्य की मिसाल पेश की।
उन्होंने कहा संकल्प में बड़ी शक्ति होती हैं और जब संकल्प राष्ट्र, धर्म और समाज के लिए हो उसमें शक्ति कई गुणा बढ़ जाती है। उन्होंने कहा बप्पा रावल के सहयोग से ललितादित्य ने अरबी हमलावरों को परास्त किया था। यहूदी अपनी मातृभूमि से खदेड़े जाने पर विश्व के कई देशों में बिखरे थे लेकिन हर पीढ़ी ने यह संकल्प किया वह अगला इस्टर इजराइल में मनाएंगे और ऐसा संघर्ष करते हुए आखिरकार वह सफल हुए।
तिब्बती लोगों को भी चीन के हमले के कारण देश छोड़ना पड़ा। तिब्बती आज भी यह संकल्प करे हुए हैं कि वह एक दिन वापिस जाएंगे। कश्मीर के विकास और उत्थान के लिए अनेकों सालों से पड़े हुए काम वर्तमान मोदी सरकार कर रही है। जो सराहनीय हैं। अनुच्छेद 370 के हटने से कश्मीर में सफलता का मील का पत्थर साबित हो रहा हैं।
उन्होंने कहा टीका लाल टपलू, जस्टिस नीलकंठ गंजू, सरला भट आदि कश्मीर में कितने ही लोग धार्मिक उन्माद के शिकार हुए। उनका केवल यह अपराध था कि वो हिंदू परिवार में जन्मे और कश्मीर में रहे। उन्होंने कहा कश्मीरी हिंदू और भारत ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा हैं। ऐसे में भूतकाल का चिंतन करते हुए और वर्तमान का आकलन करने और भविष्य के निर्माण के लिए संकल्प लेने का समय हैं। कश्मीरी हिंदू ऐसा ही कर रहा हैं और वह अवश्य सफल होगा।
भागवत की जगह होसबाले को करना पड़ा संबोधित
संघ प्रमुख की जगह दतात्रेय होसबाले को करना पड़ा संबोधन शौर्य दिवस के कार्यक्रम में संघ प्रमुख डा मोहन भागवत को कश्मीरी हिंदुओं को संबोधित करना था। लेकिन उनके कोविड संक्रमित होने के चलते सर कार्यवाह दतात्रेय होसबाले को कश्मीरी हिंदुओं को संबोधन करने की जिम्मेदारी मिली। कश्मीरी पंडित विस्थापितों की संस्था संजीवनी शारदा केंद्र की तरफ से बोहड़ी स्थित अपने केंद्र के अलावा वर्चुअल माध्यम से होसबाले के संबोधन के प्रबंध किए गए थे। इसी के साथ ही केंद्र की तरफ से 12 से 14 अप्रैल तक नवरेह के पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रमों की श्रृंखला भी संपन्न हो गई।