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Jammu News: पंजाबी को आधिकारिक भाषा में शामिल करने की मांग उठाई

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जम्मू। रानी तालाब डिग्याना में शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में रविवार को सिख सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें शहीद भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव के सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में कांग्रेस विधायक व आईसीसी महासचिव जीए मीर ने मुख्य अतिथि सहित डीडीसी सदस्य तरनजीत सिंह टोनी व अल्पसंख्यक मोर्चा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष तबीश पटेल उपस्थित रहे।
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सम्मेलन के दौरान टोनी और अन्य सिख नेताओं ने जीए मीर को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें जम्मू और कश्मीर भाषा अधिनियम 2020 में पंजाबी को आधिकारिक भाषा के रूप में शामिल करने, सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में रिक्त पदों को भरने, जम्मू और कश्मीर दोनों संभागों में सिखों के लिए राजनीतिक आरक्षण और कश्मीर में सिखों को ओबीसी का दर्जा देने की मांगें शामिल रहीं। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम के कार्यान्वयन 1947 के पीओजेके विस्थापितों के उचित पुनर्वास, 1989 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के लिए मुआवजे और जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में वरिष्ठ सिख अधिवक्ता को नियुक्त किए जाने की मांग शामिल है। इस दौरान तरनजीत सिंह टोनी ने पंजाबी को आधिकारिक तौर पर मान्यता दिए जाने और स्कूल तथा कॉलेज दोनों स्तरों पर शैक्षिक पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए जीए मीर ने सिख समुदाय को उनके मुद्दों के लिए अटूट समर्थन का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि पंजाबी भाषा और सिख प्रतिनिधित्व पर उचित ध्यान दिया जाएगा। लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। मीर ने विधानसभा सत्र में मुद्दों को उठाने का आश्वासन भी दिया। इस दौरान राजिंदर सिंह नाथू, सुरिंदर सिंह चन्नी सहित अवतार सिंह शंटी पूर्व सरपंच, इंद्रजीत सिंह पूर्व पार्षद, मोहिंदर सिंह, बाबू सिंह, डॉ. हरसिमरन सिंह, गुरदर्शन सिंह, बलबीर सिंह, परवीन सिंह, हरबख्श सिंह काला, जितेंदर सिंह मौजूद रहे।
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