जम्मू। जम्मू-कश्मीर में अनुसूचित जनजातीय खानाबदोश (धोधी गुज्जर) में 54 फीसदी लड़कियों की शादी 15 साल से कम आयु में हो रही है, जबकि 40 फीसदी 15 साल साल से पहले ही गर्भधारण कर रही हैं। जम्मू विश्वविद्यालय के समाज कल्याण विभाग से डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी कर चुकी रुचि गुप्ता ने अपनी अध्ययन के दौरान यह आंकड़े जुटाए हैं।
अपने अध्ययन के दौरान रुचि गुप्ता ने 300 महिलाओं को जोड़ा था। धोधी गुज्जर महिलाओं से जुड़े विभिन्न पहलू पर अध्ययन किया गया है। उत्तरदाताओं में 34.76 फीसदी ने 16-18 साल, 18 फीसदी ने 19-21 साल और 6.66 फीसदी ने 21-23 की आयु के बीच पहले बच्चे को जन्म दिया। उत्तरदाताओं में 75 फीसदी ने कहा कि पहले बच्चों को घर पर ही जन्म देती हैं, सिर्फ 8.33 फीसदी का अस्पताल में प्रसव होता है। 16.67 फीसदी ने कहा कि मौसमी पलायन के दौरान ही बच्चा पैदा हो जाता है। 92.76 ने कहा कि प्रसव सामान्य जबकि 7.33 का सीजेरियन होता है।
43 फीसदी महिलाओं के तीन गर्भपात होते हैं। कम आयु और ज्यादा काम होने के कारण पहला बच्चा गर्भपात का शिकार हो जाता है। कम उम्र में बच्चे को जन्म देने के कारण उच्च रक्तचाप, रक्तप्रवाह जैसे सामान्य बीमारी होती है। गर्भावस्था के दौरान 70 फीसदी महिलाएं किसी भी तरह की स्वास्थ्य जांच नहीं करवाती हैं। सिर्फ 15 फीसदी महिलाएं ही बच्चों के बीच तीन वर्ष का अंतर रखती हैं। 29 फीसदी महिलाओं के छह बच्चे हैं, जबकि 25 फीसदी के आठ बच्चे हैं। 66 फीसदी मानती हैं कि उन्हें एक ही लड़का चाहिए।
ये कारण हैं
खानाबदोश समुदाय मौसम के हिसाब से प्रवास करता है। गर्मी के समय में पहाड़ों का रुख करते हैं, जबकि सर्दियों के मौसम में मैदानी इलाकों में आते हैं। इस प्रवास के दौरान इन लोगों को जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलती हैं। महिलाएं आज भी जंगल में मिलने वाली जड़ी बूटियों का उपचार के लिए इस्तेमाल करती हैं। ब्यूरो