जम्मू। जम्मू कश्मीर में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना-सेहत के तहत निजी अस्पतालों में चार सामान्य सर्जरी को बाहर कर देने, डायलिसिस शुल्क को कम करने, लंबित देनदारी आदि के लिए निजी अस्पताल संचालक लामबंद हो गए हैं।
उन्होंने सोमवार को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात कर सेहत योजना के तहत निजी अस्पतालों के लिए बजट आवंटन 589 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 800 करोड़ रुपये करने के साथ अन्य मांगों के समाधान पर जोर दिया।
बताया गया है कि सेहत योजना के तहत पहले सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में पित्ताशय उच्छेदन, बवासीर उच्छेदन, गुदा विदर और उपांग उच्छेदन की सर्जरी की सुविधा उपलब्ध थी। लेकिन अब इसे सरकारी अस्पतालों में अनिवार्य कर दिया गया है। वहीं, निजी अस्पतालों का कहना है कि उनके सर्जरी क्षेत्र में 60 प्रतिशत तक यही सामान्य सर्जरी हो रही थी।
उपराज्यपाल से मुलाकात में बताया गया कि पहले प्रत्येक डायलिसिस के लिए भी निजी अस्पतालों में 1800 रुपये तक शुल्क वसूला जा रहा था, जिसे अब योजना के तहत 1300 रुपये तक कर दिया गया, जबकि उन्हें एक डायलिसिस का खर्च 1380 रुपये पड़ता है। ऐसी चिकित्सा सेवाएं बीमा योजना के बाहर कर देने से उन्हें प्रभावित होना पड़ेगा। उन्होंने मांग की कि वर्तमान में 589 करोड़ रुपये के बजट आवंटन में जम्मू कश्मीर सरकार अपना हिस्सा जोड़े, जिससे बजट बढ़ाया जाए। इसी तरह यूटी स्तर के 10 प्रतिशत प्रोत्साहन का भी प्रावधान किया जाए। उन्होंने बताया कि आगामी मार्च में होने वाली निविदाओं के लिए ऐसे प्रावधान लाए गए हैं, जो निजी अस्पतालों के खिलाफ हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत राइट टू हेल्थ के तहत पब्लिक अस्पतालों में पैकेज आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। एनएचए की ओर से मंजूर एचबीपी 2022 को अमल में लाया जाए। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की ओर से गाइडलाइन के तहत 1 प्रतिशत ब्याज की प्रतिपूर्ति का प्रावधान किया जाए। निजी अस्पतालों के लंबित भुगतान को जल्द जारी किया जाए। शिष्टमंडल में फैजान फारूक, डाॅ. स्वर्ण सिंह, डाॅ. उमेश गंडोत्रा, सुहेल कासिम आदि शामिल रहे।