जम्मू। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के आदेश पर पूर्व उपमुख्यमंत्री कविंद्र गुप्ता समेत कई राजनीतिक नेताओं ने सरकारी आवास खाली कर दिए हैं। इन नेताओं को संपदा विभाग ने दंडात्मक किराया देने का नोटिस भी जारी किया है। इससे याचिका दायर करने वाले संतुष्ट नहीं हैं। याचिकाकर्ता के वकील ने हाईकोर्ट में फिर से याचिका दायर करते हुए मांग की है कि इन नेताओं से वाणिज्यिक किराया वसूला जाए, न कि इनको दंडात्मक किराया देने का नोटिस जारी हो।
याचिकाकर्ता के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता शेख शकील का कहना है कि संपदा विभाग मूर्ख नहीं बना सकता। शहर के गांधीनगर में यहां किराया लाखों रुपये में है, वहां नेताओं से मामूली किराया वसूला जा रहा है। उदाहरण के तौर पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सत शर्मा को 73 हजार, कांग्रेस नेता एसएस चन्नी को 14 हजार, विधानसभा के स्पीकर अब्दुल रहीम राथर को 28 हजार, पूर्व विधायक मोहम्मद अब्बास वानी को 19 हजार, पूर्व एमएलसी विबोध गुप्ता को 13 हजार दंडात्मक किराये का नोटिस दिया गया। जबकि, जिन क्षेत्रों में ये लोग रह रहे थे, वहां सामान्य किराया भी महीने का लाखों रुपये में है। शेख शकील का कहना है कि वर्ष 2020 में प्रोफेसर एस के भल्ला की तरफ से इसे लेकर जनहित याचिका दायर की गई थी। तब रहीं मुख्य न्यायाधीश गीता मित्थल से लेकर अब तक पांच मुख्य न्यायाधीशों वाली खंडपीठ ने इसका जवाब मांगा है, लेकिन संपदा विभाग जवाब नहीं दे रहा। विभाग ने बेशक नेताओं के बंगले खाली करवाए हैं, लेकिन इनसे कॉमर्शियल किराया नहीं लिया गया, जबकि हमारी मांग ही यही थी। लिहाजा हमने हाईकोर्ट में अपील दायर की है कि इन नेताओं से दंडात्मक किराये की जगह कॉमर्शियल किराया वसूला जाए। जिस इलाके में जो नेता रहता है, उससे उसी इलाके के मार्केट किराए के हिसाब से वसूली की जाए।
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हाईकोर्ट की सख्ती के बाद इन्होंने खाली किए बंगले
पूर्व उपमुख्यमंत्री कविंद्र गुप्ता, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा, पूर्व एमएलसी सुरिंदर अंबरदार, जफर इकबाल मन्हास, कांग्रेस नेता एस एस चन्नी, विधानसभा के स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने हाल ही में सरकारी बंगले खाली किए हैं। हाईकोर्ट की कड़ी फटकार और सख्ती के बाद संपदा विभाग ने इन नेताओं के बंगले खाली करवाए।
क्या है पूरा मामला
इस संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ता शेख शकील अहमद ने साल, 2020 में हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर संपदा विभाग कई बार इन 38 बंगलों को खाली करने का नोटिस इन नेताओं को दे चुका है। इनमें से अधिकतर पूर्व मंत्रियों और पूर्व विधायकों को भाजपा-पीडीपी सरकार से दौरान ये बंगले अलॉट हुए थे। 2018 के बाद कई नेताओं से बंगले खाली करवा लिए गए थे। कई बंगले अब भी इन नेताओं के पास हैं।