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Jammu News: केंद्रशासित प्रदेश में राज्य व केंद्र के बीच संतुलन की नींव रखते नजर आए एलजी

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जम्मू। केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर विधानसभा में उप राज्यपाल मनोज सिन्हा का अभिभाषण कई मायने में अहम रहा। सारी आशंकाओं को पीछे छोड़ते हुए एलजी ने एक ओर नेकां की प्राथमिकता वाले अनुच्छेद-370 की बहाली, दरबार मूव और राजनीतिक कैदियों की रिहाई जैसे विवादित मुद्दों से दूरी बनाई। दूसरी ओर राज्य का दर्जा बहाली जैसे नेकां के वादे पर अमल का जिक्र किया तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस संबंध में जताई गई प्रतिबद्धता को भी याद दिलाना नहीं भूले। एलजी ने अपने चार साल के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाईं तो यह भी बताया कि अनुच्छेद-370 के निरस्त होने के बाद का यह चुनाव और इससे बनी सरकार प्रदेश के एक उज्जवल व समावेशी भविष्य के लिए आशा की किरण बन गई है।
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केंद्र व राज्य में परस्पर विरोधी एजेंडे व विचारधारा वाली सरकार तथा उप राज्यपाल के कई विषयों में सरकार से विशिष्ट अधिकार के नाते विधानसभा चुनाव के बाद उप राज्यपाल के अभिभाषण पर लोगों की निगाहें थीं। करीब एक सप्ताह पहले जब सत्र की तारीख घोषित हुई, उसी दिन से ये चर्चा शुरू हो गई थी, जब एलजी उमर सरकार का अभिभाषण पढ़ेंगे तो उसमें अनुच्छेद-370 की बहाली जैसे विवादित वादों का उल्लेख करेंगे या नहीं। सत्र शुरू होने के पहले तक सियासी हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा इसी विषय पर थी। एलजी ने अभिभाषण की शुरुआत तो अनुच्छेद 370 से की, लेकिन जिक्र नेकां के वादों को पूरा करने और इसे वापस लेने का नहीं था। उन्होंने अनुच्छेद-370 का जिक्र अगस्त 2019 में इसे निरस्त करने और जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद लोकतांत्रिक शासन की पुनर्स्थापना की दिशा में मील का पत्थर बताकर किया। खास बात ये रही कि एलजी के भाषण को सत्तापक्ष और विपक्ष ने पूरे धैर्य के साथ शांत होकर चुना। ऐसे में अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा बहुत अहम हो गई है।

हंगामा हुआ, लेकिन एलजी के भाषण से पहले

यूं तो विधान सभा सत्र का पहला दिन हंगामेदार रहा, लेकिन इसकी शुरुआत कुछ हट कर थी। हंगामा भी एलजी के भाषण के पहले ही हो गया। सामान्यतः राज्यपाल का अभिभाषण राज्य सरकार की नीतियों, कार्यक्रमों व प्राथमिकताओं का दस्तावेज माना जाता है। कई राज्यों में राज्यपाल के अभिभाषण की शुरुआत में ही विपक्ष विरोध जताना शुरू कर देता है। मगर, एलजी के अभिभाषण के दाैरान ऐसा नहीं हुआ। पीडीपी विधायक के प्रस्ताव पर हंगामा हुआ, लेकिन वह भी एलजी के भाषण से पहले।
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केंद्र व राज्य में समन्वय पर जोर

एलजी मनोज सिन्हा ने अपने अभिभाषण में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाली का प्राथमिकता पर जिक्र किया। इसमें केंद्र व राज्य सरकार की साझा प्राथमिकता बताई। उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने की आकांक्षा आज भी प्रबल है। प्रधानमंत्री ने कई अवसरों पर राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। साथ ही जम्मू-कश्मीर मंत्रिपरिषद ने हाल ही में एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें राज्य के दर्जे की तत्काल बहाली की मांग की गई है। उन्होंने केंद्र प्रायोजित परियोजनाओं के काम में तेजी का जिक्र तो किया ही, साथ ही नए प्रोजेक्ट को केंद्र के साने रखने की बात भी कही।

अभिभाषण पर चर्चा व सीएम के जवाब पर टिकी निगाहें
सदन में जिस तरह पहले ही दिन पीडीपी ने अनुच्छेद-370 की बहाली के मामले को उठाया है उससे साफ है कि भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत प्रक्रिया को बढ़ावा देने, राजनीतिक कैदियों की रिहाई जैसे विवादित मुद्दे भी चर्चा में जरूर आएंगे। सभी की निगाहें मुख्यमंत्री द्वारा चर्चा पर दिए जाने वाले जवाब पर टिक गई हैं।
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