जम्मू। नारको आतंकवाद मामले में दो आरोपियों की जमानत अर्जी अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जम्मू मदन लाल ने खारिज कर दी। वर्ष 2019 में मोहम्मद लतीफ डार और शफी भट जम्मू के हरी मार्केट क्षेत्र में 12 लाख की नकदी और 250 ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किए गए थे। शुरूआत में ये मामला सिर्फ नशा तस्करी का था। बाद में जांच होने पर पता चला कि आरोपी सीमा पार से आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के कहने पर तस्करी कर रहे थे। पुलिस ने मामले में यूएपीए की धाराएं भी जोड़ दीं।
दोनों तरफ की दलीलें सुनने के बाद जज ने कहा कि अपराधों के संबंध में आरोप पत्र आरोपों और दर्ज गवाहों के अवलोकन से यह मानने के लिए उचित आधार हैं कि आवेदकों के खिलाफ उपरोक्त अपराधों का आरोप प्रथम दृष्टया में सच है। मामले में अभी जांच भी चल रही है। कुछ ऐसे तथ्य बताए गए हैं। इससे यह माना जाता है कि गंभीर अपराधों के मुकदमे में देरी जमानत देने का आधार नहीं हो सकती है। दूसरे निर्णय में यूए (पी) अधिनियम के अपराधों में विशेष न्यायालय और उच्च न्यायालय द्वारा अभियुक्तों को दी गई जमानत को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रद्द कर दिया गया है। तीसरे निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जमानत दी गई है, लेकिन केवल एक सांविधानिक न्यायालय की शक्तियों के प्रयोग में। यह मानते हुए कि यूए (पी) अधिनियम की धारा 43 (डी) के तहत वैधानिक प्रतिबंध सांविधानिक न्यायालयों पर बाध्यकारी नहीं हैं। इसलिए तथ्यों, कानून और मामले पर विचार करते हुए आवेदकों का आवेदन समय से पहले और बिना योग्यता के है। इसलिए इसे अनुमति नहीं दी जा सकती। न ही जमानत दी जा सकती है। लिहाजा इसे खारिज किया जा रहा है। जेएनएफ