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Jammu News: हिमाचल व पंजाब से ज्यादा शुद्ध हैं जम्मू-कश्मीर के दुग्ध उत्पाद

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जम्मू। जम्मू कश्मीर में बीते साल में दूध और दूध से बने उत्पाद, मिठाइयां और अन्य खाद्य पदार्थों में सिर्फ 5.8 फीसदी मिलावट पाई गई। बीते सालों से प्रदेश इस मामले में लगातार सुधार कर रहा है। जम्मू-कश्मीर ने सुधार में हिमाचल और पंजाब से जैसे पड़ोसी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।
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भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की रिपोर्ट में यह आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार जम्मू-कश्मीर में बीते वित्त वर्ष में 1,338 सैंपल लिए गए। इनमें से 78 यानी कि 5.8 फीसदी सैंपल तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। पंजाब और हिमाचल प्रदेश इस मामले में जम्मू-कश्मीर से बहुत आगे हैं। पंजाब में वित्त वर्ष 2024-25 में 22 फीसदी, तो हिमाचल प्रदेश में 21.4 फीसदी सैंपल फेल पाए गए। कमोवेश वित्त वर्ष 2023-24 और 2022-23 में भी तीनों राज्यों का यही हाल रहा। वहीं वित्त वर्ष 2021-22 की बात करें तो जम्मू-कश्मीर सैंपल फेल होने में दोनों राज्यों से आगे था। उस साल जम्मू-कश्मीर के 21.40 फीसदी सैंपल फेल पाए गए। साथ ही पंजाब में 15.65 तो हिमाचल में 17.65 फीसदी सैंपल फेल पाए गए थे।

मिलावट से हो सकती हैं मधुमेह, डायरिया और कैंसर जैसी बीमारियां
गांधीनगर अस्पताल के पूर्व चिकित्सा अधीक्षक डॉ. परवीन योगराज ने बताया कि खाद्य पदार्थों में मिलावट के कई दुष्परिणाम हो सकते हैं। तात्कालिक तौर पर उल्टी होना, जी मचलना और पेट खराब होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं खान-पान में मिलावट से टाइफाइड, पीलिया, मधुमेह, कैंसर और लिवर संबधी बीमरियां भी हो सकतीं हैं। फैटी लिवर की भी सबसे बड़ी वजहों में से एक खान-पान में मिलावट ही है।
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प्रदेश में बीते सालों में खाद्य पदार्थों के कुल सैंपल व फेल पाए गए सैंपल (चार्ट)
वित्त वर्ष कुल सैंपल फेल पाए गए सैंपल फेल सैंपलों का फीसदी
2021-22 8,109 1,735 21.40
2022-23 13,502 1,195 8.85
2023-24 9,057 750 8.28
2024-25 1,338 78 5.8
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